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सर्वेश्वर टेंडर घोटाला : एसीबी का शिकंजा, सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर समेत एसई, ईई पर मामला दर्ज

डी ठक्कर कंस्ट्रक्शन कंपनी को नियम-विरूद्ध टेंडर का आरोप, तीन अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज

No image प्रदेश के बहुचर्तित सर्वेश्वर एनीकट टेंडर घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सिंचाई विभाग के बिलासपुर चीफ इंजीनियर आरएन दिव्य, सुपरीटेंडेंट इंजीनियर बीआर लाडिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मधुकर कुम्हारे के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के साथ ही 120बी और 420 के तहत अपराध दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू के एसपी अरबिंद कुजूर ने जानकारी देते हुए बताया कि तीनों के खिलाफ चालान पेश करने की अनुमति के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
ईओडब्ल्यू के मुताबिक कोरबा में बनने वाले एनीकट टेंडर घोटाले में जिस ठेकेदार ने इस टेंडर का विरोध कर इस मामले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका लगाई तो उसे 20 मई 2017 को विभाग ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया और इसके लिए विभाग ने दो टर्न ओवर का आधार बनाया। आखिर में बचे तीन में से दो पार्टियों के रेट 41 और 42 करोड़ थे, लेकिन इन दोनों के टेंडर फार्म को खारिज कर दिया गया।

ईओडब्ल्यू को जानकारी देने से किया था मना

कोरबा जिले में बनने वाले एनीकट टेंडर मामले पर पर्दा डालने में ईरीगेशन विभाग ने कोई कोर-कसर नहीं रखा। हाईकोर्ट की आड़ लेकर मामले को टर्न देने की भी कोशिश की गई थी। वहीं, इस मामले का खुलासा होने के बाद मीडिया को भी गलत हस्ताक्षर से प्रेस रिलीज जारी कर गुमराह करने का प्रयास किया गया था। इससे भी बात नहीं बनी तो सिंचाई विभाग के सचिव ने ईओडब्ल्यू को जानकारी नहीं देने के लिए पत्र लिख दिया। ईओडब्लू ने तीनों अफसरों के खिलाफ जांच के बाद सरकार को लेटर लिखा गया।

15 करोड़ अधिक टेंडर भरने वाले को दिया था टेंडर

 ईओडब्ल्यू के एसपी अरबिंद कुजूर के मुताबिक सर्वेश्वर एनीकट टेंडर घोटाले में अफसरों पर आरोप हैं कि 41 करोड़ रुपए के लोवेस्ट रेट वाले ठेकेदारों को षडयंत्र के तहत बाहर करके 56 करोड़ वाले ठेकेदार यानि 15 करोड़ अधिक का टेंडर भरने वाले को काम दे दिया गया था। सूत्रों की मानें तो नागपुर के डी ठक्कर कंट्रक्शन कंपनी को काम देने के लिए अफसरों ने नियमों को ताक में रखकर गड़बडिय़ां की है। डी ठक्कर कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका देने के लिए कुछ अन्य कंपनियों को बाहर भी कर दिया गया था।
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