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अभावों का रोना रोकर बुलेट ट्रेन की आलोचना

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भारतीय लोकतंत्र की शायद सबसे बड़ी खूबसूरती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन कई बार हम इस आजादी के चलते चीजों के साथ अन्याय कर बैठते हैं। जापानी पीएम शिंजो आबे ने गुरूवार की सुबह भारत में पहली बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी लेकिन इससे पहले ही इतनी सारी प्रतिक्रियाएं आ गई कि अच्छा भला आदमी भी भ्रम में पड़ जाए। बुलेट ट्रेन के आलोचकों को एकाएक देश में अशिक्षा, कुपोषण, आर्थिक असमानता और न जाने कितनी अव्यवस्थाएं याद आ गई। कुछ ने कहा कि जिस देश में स्वास्थ्य और शिक्षा का बुरा हाल है वहां बुलेट ट्रेन से क्या फायदा, तो कुछ ने कहा कि पहले हमारी ट्रेनों की सुरक्षा का इंतजाम कर लिया जाता। आलोचनाएं अपनी जगह सही हैं लेकिन क्या मौजूदा समस्याओं के चलते हमें नई तकनीकें और विकास के नये मॉडल नहीं अपनाने चाहिए। पहले ट्रेनें कोयले से चलती थी, फिर डीजल और अब इलेक्ट्रिक से चलती हैं। समस्याएं तब भी थी, तो क्या ये बदलाव गलत थे? देश में शिक्षा या स्वास्थ्य के इंतजाम आज भी स्तरीय नहीं है तो क्या कंप्यूटर को रिजेक्ट कर देना चाहिए या इसरो को नई-नई तकनीकों के सेटेलाइट्स का प्रक्षेपण बंद कर देना चाहिए? मंगल और चंद्र मिशन बंद कर देने चाहिए? बेरोजगारी की समस्या के चलते क्या बच्चों की पैदाइश पर कोई प्रतिबंध लागू कर देना चाहिए? यह प्रकृति का नियम है कि वक्त के अनुसार चीजें बदलती हैं। आजादी के वक्त के हालात, रहन-सहन, सुविधाओं, तकनीक में आज कितना परिवर्तन आ चुका है, किसी से छिपा नहीं है। खेती में भी हाईब्रिड का जमाना है, हल की जगह ट्रेक्टर ने ली है तो फिर बुलेट ट्रेन को लेकर इतना एतराज क्यों होना चाहिए? क्या बुलेट ट्रेन नहीं आयेगी तो दुर्घटनाएं रूक जायेंगी, गरीबी, बेरोजगारी दूर हो जायेगी?

हम चीजों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखेंगे, तो हमें मानना पड़ेगा कि बुलेट ट्रेन तेजी से आगे बढ़ते भारत की बड़ी पहचान बनने वाली है। दुनिया के चुनिंदा विकसित देशों में ही बुलेट ट्रेनों का प्रचलन है। ठीक है कि अहमदाबाद से मुंबई के लिए प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में एक बार में सिर्फ 750 यात्री सफर कर पायेंगे और इस पर एक लाख 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे लेकिन इसकी खूबियां अद्भुत हैं। इसकी अधिकतम गति 350 किमी प्रति घंटे होगी, जबकि वर्तमान में देश में ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 140 किमी है। बुलेट ट्रेन के लिए 509 किमी का ट्रैक अत्यंत आधुनिक होगा। बुलेट ट्रेन में जापान को महारथ हासिल है और वह भारत को बुलेट ट्रेन की पूरी तकनीक मुहैया करायेगा। यह साफ किया गया है कि पूरी परियोजना के लिए संसाधनों और सामग्री का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत भारत में होगा और करीब 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसका ज्यादातर ट्रेक (468 किमी) जमीन के ऊपर अर्थात एलिवेटेड होगा और सिर्फ 13 किमी जमीन पर होगा। ट्रैक का 7 किमी का हिस्सा सुरंग के रूप में समुद्र से गुजरेगा। अहमदाबाद से मुंबई के बीच 13 स्टेशन होंगे और बुलेट ट्रेन सूरत तथा बड़ोदरा से भी गुजरेगी। इस प्रोजेक्ट से मिली तकनीक अन्य ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने में भी काम आयेगी।

वास्तव में बुलेट ट्रेन प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसका वायदा उन्होंने पिछले चुनाव में किया था। माना कि इसका बजट देश के एक साल के शिक्षा बजट से भी ज्यादा है लेकिन खास बात यह है कि एक लाख 10 हजार करोड़ की लागत में से 88 हजार करोड़ रू. जापान से ऋण के रूप में मिलेगा लेकिन वह सिर्फ 0.1 प्रतिशत की दर से ब्याज लेगा और रकम की अदायगी पचास साल में की जा सकेगी। हालांकि इससे पहले जापान ने मेट्रो तथा अन्य परियोजनाओं के लिए भारत को 4 से छह प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण दिया था। यहां यह बताना भी जरूरी है कि चीन ने वन बेल्ट वन रोड परियोजना के लिए पाकिस्तान को जितना कर्ज दिया है, उसका ब्याज 8 फीसदी है। यही नहीं, प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 80 फीसदी लोग और कंपनियां चीनी ही होंगी। यहां यह सवाल उठाया जा सकता है कि आखिर जापान लगभग बिना ब्याज और इतनी लंबी अवधि का ऋण क्यों दे रहा है, तो इसकी कई वजहें हैं। पहली तो यह कि पूर्वी एवं दक्षिण चीन सागर में जापान को चीन तथा उत्तर कोरिया से जो खतरा है, उसके मद्देनजर वह भारत से और करीबी रिश्ते चाहता है। दूसरी वजह यह है कि भारत के उभरते बाजारों में जापानी कंपनियों के लिए नई संभावनाएं पैदा होंगी और तीसरी वजह, जो शायद सबसे बड़ी भी है, जापानी पीएम की मोदी के साथ पुरानी दोस्ती। शिंजो आबे तीसरी बार जापान के प्रधानमंत्री बने हैं और वे मोदी के साथ तब से जुड़े हैं जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इस तालमेल के चलते जापान की पचास से ज्यादा कंपनियां गुजरात में काम कर रही हैं। वैसे भी भारत और जापान दूसरे विश्व युद्ध के बाद से गहरे मित्र हैं।

जहां तक भारतीय रेल्वे के बुनियादी ढांचे में सुधार और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने का सवाल है, सरकार को इसे भी गंभीरता से लेना होगा लेकिन फिलहाल हमें बुलेट ट्रेन की सौगात, जो हमारा करीबी दोस्त जापान दे रहा है, का तहेदिल से स्वागत करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने ठीक ही कहा है कि गति, तकनीक और विकास इन तीनों मापदंडों पर बुलेट ट्रेन की परिकल्पना भारत को रफ्तार के नये दौर में पहुंचायेगी। मौजूदा समस्याओं और अभावों का रोना रोकर विकास के नये रास्ते से मुंह मोड़ लेना बुद्धिमानी नहीं है। बुलेट ट्रेन आधुनिक भारत के निर्माण की अहम् कड़ी है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
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