Hamar Dhamtari

जिले में फसल अवशेष, ठूंठ को जलाने तत्काल प्रभाव से किया गया प्रतिबंधित

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धमतरी - राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशानुसार जिले में फसल अवशेष पैरा, ठूंठ को जलाने तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है। उप संचालक कृषि ने बताया कि नवंबर एवं दिसंबर माह में किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाएं घटित हो रही हैं, अतः किसानों से अपील किया गया कि अपने खेतों में पैरा, ठूंठ नहीं जलाएं। किसानों द्वारा फसल अवशेष को खेतों में जलाने से भूमि में लाभदायक जीवाणुओं के नष्ट होने के साथ-साथ कार्बनडाईऑक्साईड, नाईट्रस ऑक्साईड, मिथेन गैस एवं विभिन्न प्रकार की जहरीली गैसों से वायु प्रदूषण, मृदा स्वास्थ्य बिगड़ने के अलावा मनुष्यों में दमा, फेफड़े की बीमारी एवं मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। बताया गया है कि शासन के निहित प्रावधानों के अनुसार किसी भी किसान द्वारा अपने खेतों में फसल अवशेष जलाते हुए पाए जाने पर उनके खिलाफ दण्डात्मक अथवा जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए किसान स्वयं जिम्मेदार होंगे।
उप संचालक ने बताया कि फसल के अवशेष के साथ ही गहरी जुताई कर पानी भरने से फसल अवशेष कंपोस्ट में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे अगली फसल के लिए मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्व प्राप्त होंगे। फसल कटाई के बाद खेत में बचे हुए अवशेषों को जुताई कर खेत में पलट दें अथवा इकट्ठा करके गढ्ढे, वर्मी कम्पोस्ट टांकों में डालकर कंपोस्ट बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है। फसल कटाई के बाद खेत पर पड़े फसल अवशेषों को बिना जलाए बोनी हेतु जीरोसीडड्रील इत्यादि से बुवाई करने पर खेत की नमी के साथ-साथ ऊपर पड़े हुए फसल अवशेष भी नमी संरक्षण का कार्य करते हैं, जिससे खरपतवार नियंत्रण एवं बीजों के सहीं अंकुरण के लिए मल्चिंग के रूप में कार्य होगा। साथ ही फसल अवशेषों का उपयोग मशरूम उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। खेत में ही डिकम्पोसर तरल पदार्थ से फसल अवशेषों को सड़ाकर खाद तैयार करके रासायनिक खाद क्रय करने की राशि में काफी बचत की जा सकती है। उदाहरण के लिए एक टन पैरा न जलाकर डिकम्पोसर से सड़ाकर कम्पोस्ट खाद बनाने पर 5 किलोग्राम नत्रजन, 12 किलोग्राम स्फुर एवं 5 किलोग्राम पोटाश खाद खेत में तैयार करने से कीट व्याधि एवं खरपतवारों की रोकथाम, फसल लागत कम एवं उपज अधिक तथा आमदनी में वृद्धि किया जा सकता है। 

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