धमतरी। बालक माध्यमिक शाला हसदा नं1में बस्ताविहीन विधालय के तहत छात्रों को ईंट निर्माण विधि एवं प्रक्रिया को समझाया एवं परंपरागत खपरैल पट्टी एवं नल्ली बनाकर सिखाया गया। इस कार्य में शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष श्री रेखराम साहू ने बतौर प्रशिक्षक के रूप ईंट निर्माण करने की प्रक्रिया को बताया तो वही परस राम ने खपरैल बनाने की प्रक्रिया को सरलता से समझाया।
उन्होंने कहा कि कछारी मिट्टी या मटासी मिट्टी उपयुक्त होता है, इस मिट्टी के अच्छे से लेपन तैयार कर लोंदा बनाकर सांचे में भरा जाता है, सांचे को पलट कर धीरे से ऊपर उठाते हैं, फिर धूप में सुखाते हैं, पूरी तरह सूखने के बाद इसे चिमनी भट्टा में पकाते हैं इस प्रकार लाल ईंट का निर्माण होता है। ईंट की मांग आवास निर्माण के साथ, दिनों दिन बढ़ती जा रही है इसलिए यह व्यवसायिक रूप में रोजगार के बहुत बड़ा साधन है ईंट एवं खपरैल निर्माण को लेकर बच्चे खासे उत्साहित नजर आये। विद्यार्थियों के रोजगार कौशल उन्नयन संबंधी प्रोत्साहन प्रदान कर जागृत करना ताकि ग्रामीण स्तर के व्यवसाय में सहभागिता सुनिश्चित हो पायें।
इसके लिए न्यूनतम कक्षा से ही बच्चों में मृदाकला, काष्ठ कला, चित्रकला, संगीत, बागवानी प्रशिक्षण की व्यवस्था किए हैं ताकि छात्र पढ़ाई के साथ साथ अन्य प्रकार के कौशलों में निपुण होकर भविष्य में रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए प्रेरित हो।इस प्रशिक्षण में प्रधान पाठक श्रीअर्जुन सिंह कंवर, शिक्षक शिवशंकर साहू, श्रीमती सरोजबाला साहू, भोलेश्वरी, शाला समिति के अध्यक्ष रेखराम साहू, सदस्य परस, भीम साहू, पूरन साहू, बाबूलाल निषाद, देवी निषाद एवं उमेंदी साहू का सहयोग रहा हैं।




