धमतरी @ संदेश गुप्ता। छत्तीसगढ़ में कमरछठ पर्व का बड़ा ही महत्व है। माताएं इस दिन संतान के स्वास्थ खुशहाली एवं दीर्घायु की कामना करने के लिए व्रत रखते हैं। पर्व के अवसर पर गायत्री शक्ति पीठ नगरी मंदिर व घर-आंगन में मिट्टी खोदकर सगरी बनाया गया । इसमें पानी डालकर फुल-पत्तियों से सजाए गया। जिसके बाद भगवान शिव परिवार की स्थापना विधि-विधान से कर पूजा-अर्चना की गई ।
कमरछठ व्रत में तालाब में पैदा हुए खाद्य पदार्थ अथवा बगैर जोते हुए खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं। इसलिए इस दिन बिना हल चली वस्तुओं का ही महत्व होता है, महिलाएं पूजा के बाद पसहर चावल जिसे लाल भात कहते हैं और 6 प्रकार की भाजी का सेवन करती हैं। इस दिन सिर्फ भैंस के दूध और दही का ही सेवन किया जाता है। संतान की लंबी उम्र के लिए छत्तीसगढ़ में आदिकाल से ये त्योहार मनाया जा रहा है।
कमरछठ व्रत में तालाब में पैदा हुए खाद्य पदार्थ अथवा बगैर जोते हुए खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं। इसलिए इस दिन बिना हल चली वस्तुओं का ही महत्व होता है, महिलाएं पूजा के बाद पसहर चावल जिसे लाल भात कहते हैं और 6 प्रकार की भाजी का सेवन करती हैं। इस दिन सिर्फ भैंस के दूध और दही का ही सेवन किया जाता है। संतान की लंबी उम्र के लिए छत्तीसगढ़ में आदिकाल से ये त्योहार मनाया जा रहा है। यह त्यौहार पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी माताऐ और बहने बड़ी ही धूम धाम से रीति रिवाज पूर्वक अपने संतान की खुशहाल जीवन,मंगलकामना, स्वस्थ जीवन के लिए नगरी नगर के आज गायत्री शक्ति पीठ नगरी में उपस्थित होकर परायण संपन्न की।




