परखंदा में खस की खेती ने बढ़ाई महिलाओं की आय

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धमतरी। जिले के कुरुद विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत परखंदा आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। यहां की महिलाओं ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़ते हुए ‘खस’ (वेटिवर) की खेती अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि गांव को हरित विकास की दिशा में भी आगे बढ़ाया है।

गांव के अधिकांश परिवार पहले वर्षा आधारित खेती और मजदूरी पर निर्भर थे। सीमित आय और अनिश्चितता के कारण महिलाओं की भूमिका घर तक सीमित थी। वर्ष 2024-25 में मनरेगा एवं डीएमएफ मद के सहयोग से गठित “परखंदा धान के कटोरा उत्पादक समिति” ने आजीविका के नए विकल्प तलाशे और 2.50 एकड़ भूमि में खस की खेती शुरू की। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने स्वयं पौधरोपण, सिंचाई और देखभाल का कार्य संभाला।

खस एक बहुउपयोगी पौधा है, जिसकी जड़ों से सुगंधित तेल और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बेहतर उत्पादन से समूह की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही महिलाओं ने 6 एकड़ क्षेत्र में वृक्षारोपण कर गांव में हरियाली बढ़ाई और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

खस उत्पादन से मिली आय ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। वे अब बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं। बैंकिंग, रिकॉर्ड संधारण और विपणन जैसे कार्यों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ी है।

समूह की सदस्य तुकेश्वरी साहू ने बताया, “शुरुआत में हमें खेती की जानकारी कम थी, लेकिन प्रशिक्षण और मेहनत से हमने यह काम सीख लिया। अब हम अपनी आय खुद कमा रहे हैं।”
सरपंच माधुरी साहू ने बताया कि, “पहले महिलाएं घर तक सीमित थे, अब हर काम में आगे हैं और अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं।”

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