सुरक्षा के रखवाले खुद, असुरक्षा के घेरे में ,कौन बताया अपनी पीड़ा, विभाग के पुराने डेरे में

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धमतरी @ विश्वनाथ गुप्ता…. धमतरी में चाकू बाजी एक व्यवहार बन चुका है किसी को आम चर्चा भी करनी है तो पूरी मुस्तैदी के साथ रहना पड़ता है ,, आजू बाजू चल रहे लोगो को आप सही से रोड पर चलने की सलाह भी नही दे सकते ,, और घूरना तो बिलकुल मना है आपने की सूखे नशे बाज को घूरा और आपकी लॉटरी निकलनी लगभग तय है चलो ये सब धमतरी में चलता रहता है आते है खास मुद्दे पर जैसा की हेडिंग है उस पर
पुलिस विभाग में अभी भी निचले तबके के कर्मचारियों ,जवानों के लिए अभी की परिस्थिति से निपटना मुश्किल होता जा रहा है क्यों की सवाल है नागरिकों की सुरक्षा के साथ अपनी भी सुरक्षा का क्योंकि जान तो सबकी है और परिवार भी सबका है भले ही भर्ती के समय ये सपथ दिलाई जाती है की हम ड्यूटी में जान की परवाह नही करेंगे ,,लेकिन सुरक्षा तो सुरक्षा है.
इसलिए आधुनिक दौर में पुराने ठर्रे में चल रही पुलिस व्यवस्था में भी सुधार आवश्यक है नए विकल्प भी जरूरी है पुराने हो चुके लकड़ी के भरोसे अपराधी अंकुश अब सही नही है जवानों को अब नए सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है  जैसे 18,से 20 वॉट पवार क्षमता वाले इलेक्ट्रिक स्टीक,, रबर गन,, खुद की सुरक्षा के लिए आर्म प्रुफ जैकेट आदि जो व्यवस्था को आसान बना सके ,,यह आज के परिवेश में उन पुलिस जवानों के लिए बहुत जायदा जरूरी है.
 जिन्हे सूखे नशे में डूबे और पुष्पा भाई ,, रॉकी भाई, काली भाई जैसे किरदार में जाने का वाले नए प्रकार के अपराधियो को पकड़ने का टास्क रहता है

क्योंकि अपनी सुरक्षा तगड़ी होगी तो जनता की सुरक्षा भी तगड़ी होगी इसमें कोई दौराय नही है
आला अधिकारियों को अपराध से कैसे लड़ना है इस पर जितना चिंतन करना बनता है तो वही ये भी चिंतन करना जरूरी है की अपने अधीनस्थ काम करने वाले साथी जवानों की भी सुरक्षा नई व्यवस्था के साथ जरूरी है.

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