स्व-सहायता समूह से जुड़कर पलसाभाड़ी की 14 महिलाओं ने गढ़ी आजीविका की राह

रायपुर। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा में आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की भावना को आगे बढ़ाते हुए गरीब, ग्रामीण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर रहा है। इसी सोच को धरातल पर साकार करते हुए ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर महासमुन्द जिले की ग्रामीण महिलाएं आज स्वरोजगार और आयवर्धक गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता ओर बढ़ रही हैं।

इसी क्रम में महासमुंद जिले के विकासखण्ड बसना के ग्राम पंचायत खोगसा के आश्रित ग्राम पलसाभाड़ी की श्रीमती सावित्री पटेल की सफलता इसी बदलाव की कहानी है। बसना के ग्राम पलसाभाड़ी में 17 अप्रैल 2018 को 14 महिलाओं ने मिलकर भवानी महिला स्व सहायता समूह का गठन किया। समूह की सभी महिलाएं गरीबी रेखा परिवार से संबंधित थीं और गृहणी के रूप में अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। बिहान योजना के तहत आयोजित सीआरपी चक्र के दौरान पहुंचीं सीआरपी दीदियों ने महिलाओं को स्व सहायता समूह के गठन, बचत, ऋण सुविधा तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर महिलाओं ने एकजुट होकर स्व सहायता समूह का गठन किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी विकास यात्रा शुरू की।

समूह गठन के बाद  सावित्री पटेल ने व्यक्तिगत आय बढ़ाने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। उनके घर में व्यवसाय के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध था, लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी के कारण वे इसे बड़े स्तर पर शुरू नहीं कर पा रही थीं। बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह को प्राप्त आरएफ एवं सीआईएफ राशि तथा बैंक लिंकेज से मिली वित्तीय सहायता ने सावित्री के सपनों को नई उड़ान दी। उन्होंने मशरूम उत्पादन के साथ-साथ गाय पालन एवं दुग्ध उत्पादन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया।

इन गतिविधियों से सावित्री पटेल के परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया। श्रीमती सावित्री बताती है कि समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 85 हजार रुपये थी, जो विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाने के बाद बढ़कर लगभग 2 लाख 38 हजार रुपये वार्षिक हो गई है। ग्राम संगठन से प्राप्त राशि का भी समयपूर्व ब्याज सहित भुगतान किया जा रहा है। सावित्री बताती हैं कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक मजबूती मिलने पर उनके आत्मनिर्भर होने का विश्वास भी बढ़ा है। वे बताती है कि परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में अब पहले की अपेक्षा अधिक सुविधा हो रही है।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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