कुरूद। देश के सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी आरक्षण को समाप्त करने के दृष्टिकोण से आरक्षण के अंदर आरक्षण का उप वर्गीकरण का फैसला दिया है, वह संवैधानिक है.इससे एससी एवं एसटी की जातियां बट जाएगी और एक ही वर्ग के अंदर उच्च नीच का भेदभाव पैदा होगा. कोटे के अंदर कोटे का उप. वर्गीकरण से एससी एसटी का आरक्षण पूर्णता समाप्त हो जाएगा.
उपरोक्त बातें भारतीय मूल निवासी समाज के संस्थापक पंडित शंकर दादा, सर्व आदिवासी समाज के धमतरी जिला अध्यक्ष जे. एल.ध्रुव तथा पिछड़ा वर्ग संयोजन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट शत्रुघ्न साहू ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही है. उन्होंने कहा है कि यह सरकार की सोची समझी चाल है जिसे सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से संवैधानिक रूप से करवाया गया.छत्तीसगढ़ में गोड,सतनामी और सरगुजा से हल्बा जाति को आरक्षण से बाहर किया जा सकता है. उन्होंने कहा है कि चतुर्थ श्रेणी के शासकीय कर्मचारी से लेकर राजपत्रित अधिकारी और नेता मंत्री तथा 10 एकड़ जमीन वाले किसानों को भी आरक्षण से बाहर कर सकते हैं.एससी एसटी समाज के गरीब, किसान, मजदूर को यदि आरक्षण के बंटवारे में एक दो प्रतिशत मिल भी जाएगा तो वह अपने बच्चों को नौकरी में भेज भी नहीं सकते.क्योंकि वह उच्च शिक्षा तो क्या माध्यमिक शिक्षा तक नहीं पढ़ा पाएंगे.फिर एक भी योग्य नहीं पाए गए ऐसा सील मोहर लगाकर आपके आरक्षण में स्वर्ण को सीधी भर्ती दे देंगे. जो समाज लड़ता नहीं वह हक अधिकार मान सम्मान नहीं पा सकता. सामाजिक नेताओं ने कहा है कि इसलिए अपने समाज के भविष्य के लिए एससी एसटी दोनों समाज 21 अगस्त को धमतरी में 50000 की संख्या में उपस्थित होकर सरकार को समाज की ताकत का एहसास कराएं. ओबीसी समाज को भी अपने 27 परसेंट आरक्षण के लिए आंदोलन करना चाहिए. सामाजिक नेताओं ने कहा है कि अपने संवैधानिक हक अधिकार के लिए हमें एक मंच में आना ही होगा.




