बिटिया की विदाई पर माता-पिता का साहसिक निर्णय, मरणोपरांत नेत्रदान कर दो चेहरों पर लौटाई रोशनी

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मनीष सरवैया वरिष्ठ पत्रकार महासमुंद.... “मेरा समर्पण ऐसा हो कि मर कर भी कुछ काम आ सकूं…” इन पंक्तियों को अक्षरशः जीवंत करते हुए बसना के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार ने शोक की इस अत्यंत कठिन घड़ी में मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा आज हर जुबान पर है।

बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के बड़े भ्राता एवं अग्रवाल सभा अध्यक्ष रामचंद्र अग्रवाल तथा अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की कोषाध्यक्ष अनीता अग्रवाल की पुत्री छाया अग्रवाल का  10 जनवरी 2026 को असामयिक निधन हो गया। अपनी संतान को खोने के अपार दुख के बीच भी, माता-पिता ने समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को प्राथमिकता दी और अपनी लाड़ली की स्मृति को अमर बनाने के लिए उसके नेत्रदान का साहसिक निर्णय लिया।

परिजनों की इच्छा और सहमति के पश्चात, विशेषज्ञों व चिकित्सकों के दल ने पूरे सम्मान के साथ दिवंगत छाया के दोनों नेत्र सुरक्षित रूप से प्राप्त किए। चिकित्सकों के अनुसार, इन नेत्रों के माध्यम से दो ऐसे व्यक्तियों के जीवन में पुनः प्रकाश लौट सकेगा, जो वर्तमान में दृष्टिहीनता के कारण अंधेरी दुनिया में जीने को मजबूर हैं।

नेत्रदान को ‘महादान’ की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन शोक के समय भावुकता से ऊपर उठकर इस संकल्प को निभाना अत्यंत कठिन होता है। श्री रामचंद्र अग्रवाल और श्रीमती अनीता अग्रवाल के इस निर्णय ने न केवल अपनी पुत्री को एक गरिमामयी विदाई दी है, बल्कि भविष्य के लिए एक नई राह भी दिखाई है। अब छाया की आंखों से कोई और इस खूबसूरत दुनिया को देख पाएगा और नए सपने बुन सकेगा।

इस महान कार्य के लिए क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और सामाजिक संगठनों ने अग्रवाल परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीहरि अपने श्रीचरणों में (बैकुंठ) स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

 

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