धमतरी…. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नक्शा प्रोजेक्ट के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित नगर पालिक निगम धमतरी क्षेत्र में शहरी भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना के तहत निगम क्षेत्र के 29.4 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित 40 वार्डों में अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक के माध्यम से सर्वे कर शहरी भूमि रिकार्ड का अद्यतनीकरण किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य भूमि संबंधी विवादों को कम करना तथा बेहतर एवं पारदर्शी शहरी नियोजन को बढ़ावा देना है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित इस परियोजना के अंतर्गत राजस्व एवं नगर निगम के अमले द्वारा भूस्वामियों की उपस्थिति में मकान, भवन एवं संस्थानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
आज नक्शा प्रोजेक्ट की प्रगति, भौतिक सत्यापन की कार्यविधि तथा फील्ड में आ रही तकनीकी एवं व्यवहारिक समस्याओं के अवलोकन हेतु भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के प्रतिनिधियों ने धमतरी का भ्रमण किया। इस दौरान भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग से श्री मयंक राजपूत (मैनेजर, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली) एवं श्री अजीत कुमार (उप सचिव, भूमि संसाधन विभाग, भारत सरकार) उपस्थित रहे।
प्रतिनिधियों द्वारा गोकुलपुर निवासी श्री देवनाथ से नक्शा प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्राप्त होने वाले यूआर प्रॉपर्टी कार्ड एवं भविष्य में होने वाले लाभों के संबंध में जानकारी ली गई। साथ ही उनके उपलब्ध दस्तावेजों का नजूल अभिलेखों से मिलान कर नजूल एवं परिवर्तित भूमि अभिलेखों के अद्यतनीकरण की स्थिति का अवलोकन किया गया।
भारत सरकार के प्रतिनिधि श्री मयंक राजपूत द्वारा परियोजना से जुड़े सर्वे दल को आवश्यक तकनीकी निर्देश दिए गए। वहीं कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्णतः त्रुटिरहित ढंग से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। उप सचिव भारत सरकार श्री अजीत कुमार द्वारा नक्शा प्रोजेक्ट के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं मुनादी के माध्यम से आमजन को जागरूक करने हेतु नगर निगम को निर्देशित किया गया।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने भारत सरकार के अधिकारियों को जानकारी देते हुए बताया कि धमतरी जिला नक्शा प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित की जा रही है। भौतिक सत्यापन कार्य भूस्वामियों की उपस्थिति में किया जा रहा है, जिससे आमजन का विश्वास बढ़ा है और आपत्तियों की संभावना न्यूनतम हुई है।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने यह भी बताया कि जिला प्रशासन द्वारा राजस्व, नगर निगम एवं तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे फील्ड स्तर पर आ रही समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पा रहा है। नक्शा प्रोजेक्ट के माध्यम से तैयार होने वाले यूआर प्रॉपर्टी कार्ड भविष्य में शहरी नागरिकों के लिए संपत्ति संबंधी कार्यों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे तथा भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि आमजन को परियोजना के लाभों से अवगत कराने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार, मुनादी एवं शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही प्राप्त सुझावों के आधार पर कार्यप्रणाली में सतत सुधार किया जा रहा है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि निर्धारित समय-सीमा में धमतरी जिला नक्शा प्रोजेक्ट का सफल एवं मॉडल क्रियान्वयन करेगा, जिसे अन्य जिलों के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।
इसके साथ ही भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण (DILRMP) के अंतर्गत तहसील धमतरी स्थित मॉडर्न रिकॉर्ड रूम, कम्पैक्टर प्रणाली, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव, आम नागरिकों को सरल एवं सुलभ रूप से भू-अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तथा सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था का भी अवलोकन किया गया। भुईंया, भू-नक्शा एवं ई-कोर्ट के माध्यम से भू-अभिलेखों की उपलब्धता और रखरखाव की प्रणाली से भारत सरकार के प्रतिनिधि प्रभावित हुए।
राजस्व प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण हेतु संचालित ई-कोष प्रणाली की कार्यविधि से अवगत होकर प्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त की। इसके अतिरिक्त राजस्व ग्रामों की आबादी भूमि में निवासरत परिवारों को अधिकार अभिलेख प्रदान करने की स्वामित्व योजना की जानकारी भी ली गई। जिले में तैयार एवं वितरित किए गए कुल अधिकार अभिलेखों की ऑनलाइन प्रविष्टि का पोर्टल के माध्यम से अवलोकन कर जिला प्रशासन द्वारा अपनाई जा रही कार्यप्रणाली की सराहना की गई।
नक्शा प्रोजेक्ट के मास्टर ट्रेनर दीपचंद भारती, राजस्व निरीक्षक (भू-अभिलेख) द्वारा फील्ड में आने वाली तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं की विस्तृत जानकारी प्रतिनिधियों को दी गई।
अवलोकन के दौरान राकेश साहू, नोडल अधिकारी नक्शा प्रोजेक्ट एवं उपायुक्त भू-अभिलेख छत्तीसगढ़, प्रभात प्रधान (सर्वे ऑफ इंडिया), पी.सी. सार्वा उपायुक्त नगर पालिक निगम, कुसुम प्रधान तहसीलदार, मधुकर सिरमौर अधीक्षक भू-अभिलेख, हेमंत डड़सेना एवं भीम हरदेल (जीआईएस एक्सपर्ट, छत्तीसगढ़) सहित संबंधित क्षेत्रीय अमला मौजूद रहा।


