किसानों से रकबा समर्पण करवाने के लिए जा रहा है षड्यंत्र
कुरुद …. किसानों से धान खरीदी करने की सरकार की महत्वपूर्ण योजना धमतरी जिले में फेल होती दिख रही है l धमतरी जिले के किसान इस बार सरकार के धान खरीदी के तरिके से बहुत नाखुश है l किसानों से धान खरीदी के नाम पर काटे जाने वाला ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन पिछले लगभग 8 दिनों से बंद है l धान खरीदी के नाम पर भौतिक सत्यपान के लिए किसानों के घरों में जाकर उन्हें परेशान किया जा रहा l समिति प्रबंधकों का कहना है कि आगे भी धान खरीदी के लिये टोकन काटने से उन्हें मना किया गया है l
टोकन कटने के बाद धान बेचते समय किसानों से करवाया जा रहा है रकबा समर्पण –
कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें टोकन काटने के बाद भी एक दो कट्टा धान कम बेचने के लिए दबाव डाला गया और उनसे रकबा समर्पण करवाया गया है l
जिसके चलते उन्हें खरीदी केंद्र से अपना धान घर वापस लाना पड़ा l
धान खरीद केंद्र सिरसिदा में धान बेचने आए गुदगुदा के एक किसान व्यास राम साहू ने बताया कि उनके भाई डालूराम साहू का टोकन आज 19 जनवरी को कटा था , किसान व्यास राम साहू ने कहा कि मैं अपने भाई डाली राम साहू के धान को खरीद केंद्र सिरसिदा लाया तो मेरे धान को यह कह कर वापस कर दिया गया कि यह धान किसान डालूराम साहू का नहीं है l
मुझे टोकन काटने के बाद भी अपने भाई डालूराम साहू का धान वापस लाना पड़ा l किसान ने बताया कि जब मेरे घर में भौतिक सत्यपान के लिए पटवारी और अधिकारी आए थे, तब घर में बड़ा बुजुर्ग कोई नहीं था बच्चे थे, जिनके पास सही जानकारी नहीं थी, जिसके चलते घर में धान नहीं है ऐसा अधिकारियों ने अपने रिकॉर्ड में लिख लिया l
इस संबंध में सिरसिदा के पटवारी दशरथ लाल बंजारे ने कहा कि जब हम दो बार किसान डालूराम साहू के घर गए तो उनके घर में धान नहीं था, जिसके चलते भौतिक सत्यपान में धान नहीं पाया l
अभी भी 80 किसान नहीं बेच पाये धान- प्राथमिक कृषि शाखा सहकारी समिति गुदगुदा के अंतरगत 80 किसानों का अभी तक एक बार का भी टोकन नहीं कटा है l जिसमें लगभग सभी किसान छोटे किसान हैl
किसानों की इस समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष लाला चंद्राकर का कहना है कि धमतरी जिले के सोसाइटियों में धान खरीदी के नाम पर भौतिक सत्यापन करके मौखिक आदेश के आधार पर जगह-जगह नोडल अधिकारी नियुक्त करके जबरदस्ती रकबा समर्पण का कार्य जिला कलेक्टर द्वारा किया जा रहा है, और 10% खरीदी कम करना है कह कर मौखिक दबाव बनाया जा रहा है। यह अनुचित है जबकि एक तरफ सरकार किसानो के धान का एक-एक दाना खरीदेंगे बोलते हैं। राज्य सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिख रहा है। आंनावारी के आधार पर धान खरीदना ही था। तो सभी जिले का अलग-अलग उत्पादन है जिसे जारी कर देते l ऊपर से 20 क्विंटल 80 किलो खरीद हैं। फिर भी मन नहीं भर रहा है।
शेष धान बेचने से वंचित किसान किसान जितने भी हैं सब अपना अपना कलेक्टर ऑफिस में जाकर खाली करेंगे l जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। हम इसमें समझौता कतई नहीं करेंगे। आने वाले दिनों में यदि धान नहीं खरीदना है तो जिला प्रशासन आज से आदेश जारी कर दे हम सोसाइटी में धान नहीं बचेंगे ना ही सोसाइटियों से कर्ज़ लेंगे। अभी भी कई किसानों का सोसाइटी में कर्ज देना बाकी है l
इस विषय में जब धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा से संपर्क किया गया तो उनका फोन नहीं लगा l इस बारे में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होने मोबाइल नहीं उठाया l




