ससुर ने पिता बनकर किया बहू का कन्यादान

SHARE:

कुरुद। समाज की रूढ़िवादी जंजीरों को तोड़कर मानवीय संवेदनाओं का एक नया अध्याय सिर्री की पावन धरा पर लिखा गया. जहाँ अक्सर पति के असमय देहावसान के बाद बहू का जीवन वैधव्य के अंधकार और एकाकीपन की भेंट चढ़ जाता है. वहीं पटेल समाज के अध्यक्ष शोभाराम पटेल ने अपनी बहू को बेटी का गरिमामय स्थान देकर समाज के समक्ष एक ‘क्रांतिकारी उदाहरण’ प्रस्तुत किया है.

10 फरवरी को शोभाराम पटेल के निवास पर आयोजित यह विवाह समारोह केवल दो हृदयों का मिलन नहीं, बल्कि पुरानी मान्यताओं का विसर्जन था. शोभाराम ने पिता का दायित्व निभाते हुए जांजगीर-चांपा निवासी राजा पटेल के साथ अपनी बहू का पुनर्विवाह पूर्ण विधि-विधान से कराया. शोभाराम पटेल ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपनी बहू को पराया न मानकर उसे पुत्रीवत स्नेह और सम्मान दे, तो गृह वास्तव में स्वर्ग का प्रतिरूप बन सकता है.

​इस अवसर पर पटेल समाज के प्रदेश संरक्षक बंशीलाल पटेल, प्रदेशाध्यक्ष सुनील नायक सहित अनेक गणमान्य जनों ने साक्षी बनकर इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की. वैदिक मंत्रों की गूंज और सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न इस विवाह ने यह संदेश दिया कि मानवता और प्रेम का स्थान शास्त्रोक्त रूढ़ियों से कहीं ऊपर है.

विदित हो कि लगभग छह वर्ष पूर्व शोभाराम जी के पुत्र डेसमन पटेल का आकस्मिक निधन हो गया था. इस वज्रपात ने परिवार को झकझोर दिया था, किंतु उनकी बहू सरोजनी पटेल ने धैर्य का दामन नहीं छोड़ा. वर्तमान में अस्पताल में नर्स के रूप में सेवा दे रहीं सरोजनी के जीवन में खुशियों का रंग भरने हेतु शोभाराम ने एक ऐसा संकल्प लिया, जिसने पितृ-धर्म को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया.

 

Join us on:

Leave a Comment