धमतरी में ‘STREE’ परियोजना की जल्द होगी शुरुआत अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण

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धमतरी। जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘STREE’ परियोजना की जल्द शुरुआत होने जा रही है। महिलाओं और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को आधुनिक एवं आवश्यकता-आधारित तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से कलेक्टर अबिनाश मिश्रा सहित National Institute of Technology Raipur से आए अधिकारियों ने पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर का स्थल निरीक्षण किया। यहीं पर महिला स्किल सैटेलाइट सेंटर की स्थापना की जाएगी।
यह परियोजना National Institute of Technology Raipur के सहयोग से संचालित होगी।
‘STREE’ (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) एक प्रमुख महिला सशक्तिकरण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं एवं महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करना है। परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में 300 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
परियोजना का क्रियान्वयन NIT Raipur Foundation for Innovation & Entrepreneurship (NITRRFIE) द्वारा किया जाएगा। इस पहल के तहत महिलाओं को सिलाई एवं हैंडलूम कार्यों का उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग कर उनके पारंपरिक हुनर को निखारा जाएगा। प्राचार्य ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि तीन माह की होगी तथा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण में जिले के युवाओं को भी शामिल किया जाए तथा जो महिलाएं पहले से कार्यरत हैं, उन्हें उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण देकर और सशक्त बनाया जाए। उन्होंने महिलाओं के लिए अन्य राज्यों में एक्सपोजर विजिट की भी बात कही, जिससे वे नए बाजार, डिज़ाइन और तकनीकों से परिचित हो सकें। इस संबंध में उपस्थित लोगों से सुझाव भी मांगे गए।

परियोजना से डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, डॉ. चंदन कुमार, डॉ. विकास कुमार, सहायक संचालक कौशल विकास  शैलेंद्र गुप्ता,  धर्म सिंह एवं भाग्योदय संस्था के प्रमुख श्री देवांगन जुड़े हुए हैं।
उललेखनीय है कि धमतरी जिले का चयन इस परियोजना के लिए विशेष कारणों से किया गया है। जिले में लगभग 52 प्रतिशत वन क्षेत्र है तथा लगभग 4 लाख से अधिक ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाएं निवास करती हैं। यहां 1500 से अधिक परिवार और 1000 से अधिक बुनकर हस्तकरघा गतिविधियों से जुड़े हैं। कृषि अपशिष्ट और पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।

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