केंद्रीय संचार ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम में नशे के दुष्परिणामों, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली की दी जानकारी
‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–संकल्प अभियान’ एवं राष्ट्रीय पोषण माह के तहत चित्र प्रदर्शनी, रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित
धमतरी। युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा पोषण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज स्वर्गीय छोटेलाल श्रीवास्तव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धमतरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय संचार ब्यूरो, रायपुर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–संकल्प अभियान’ एवं ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में चित्र प्रदर्शनी, रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को नशामुक्ति, पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सर्वा ने चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पाठक ने की।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सर्वा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा अवस्था जीवन की दिशा और भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण पड़ाव है। युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा का उपयोग शिक्षा, कौशल विकास, खेल, नवाचार तथा समाज एवं राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश की युवा शक्ति स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित और जिम्मेदार होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं और युवतियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए सकारात्मक सामाजिक वातावरण तैयार करने में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
पोषण के पांच सूत्रों को अपनाने की अपील
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी उषा किरण चंद्राकर ने राष्ट्रीय पोषण माह के उद्देश्य और विभागीय सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों एवं हितग्राहियों को उपलब्ध कराए जाने वाले संतुलित एवं पौष्टिक आहार, निर्धारित मेन्यू के अनुसार पोषण आहार वितरण तथा रेडी-टू-ईट आहार के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कुपोषण के प्रमुख प्रकारों—स्टंटिंग, वेस्टिंग और कम वजन—के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया तथा पोषण के पांच सूत्रों को अपनाने की अपील की। इनमें जीवन के पहले 1000 सुनहरे दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया की रोकथाम, डायरिया का प्रबंधन तथा स्वच्छ जल एवं स्वच्छता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित बचपन ही मजबूत भविष्य की नींव है। “सही पोषण, देश रोशन—कहीं कोई न रहे कुपोषित” के संदेश को साकार करने के लिए परिवार, समुदाय और युवाओं की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पाठक ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहकर शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत की मजबूत नींव आज के युवाओं के संकल्प, अनुशासन और कर्मठता से तैयार होगी।
प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिताओं से दिया जागरूकता का संदेश
चित्र प्रदर्शनी में नशीले पदार्थों के शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों के साथ पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित संदेश प्रदर्शित किए गए। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर नशामुक्त जीवन तथा संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में नशामुक्ति एवं सामाजिक जागरूकता विषय पर रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता, स्वस्थ जीवन और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सर्वा ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। कार्यक्रम ने युवाओं में नशे के विरुद्ध जागरूकता, आत्म-अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने के साथ ही पोषण और कुपोषण की रोकथाम के लिए सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया।










