प्रदीप साहू @ नगरी। मंचों से “किसान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा” का ढोल पीटने वाली व्यवस्था जमीनी हकीकत में कितनी खोखली है, इसका जीता-जागता उदाहरण सिहावा विधानसभा क्षेत्र के नगरी में सामने आया है। यहां एक किसान को न्याय के लिए खेत नहीं, मंडी नहीं बल्कि विधायक निवास का दरवाजा खटखटाना पड़ा और वह भी धान के कट्टे उठाकर।

ग्राम कल्लेमेटा निवासी किसान कृष्ण कुमार उईके ने प्रशासनिक मनमानी से तंग आकर विधायक अंबिका मरकाम के निवास के सामने धान के कट्टे रखकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान का आरोप है कि नियमों की आड़ में प्रशासन ने उसे सरेराह अपमानित किया और जबरन धान जब्त करवा लिया।
रास्ते में रोका, कागज़ पूरे होने के बावजूद धान छीना
किसान के नाम उपार्जन केंद्र डोगरडुला में 60 क्विंटल धान का वैध टोकन जारी हुआ था। 13 जनवरी को किसान धान लेकर मंडी के लिए रवाना हुआ। 45 क्विंटल धान पिकअप वाहन से मंडी पहुंच गया, लेकिन 15 क्विंटल धान से लदे ट्रैक्टर को बिलबदर के पास तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने रोक लिया।कृष्ण कुमार का आरोप है कि सभी दस्तावेज सही पाए जाने के बावजूद अधिकारियों ने दबाव बनाकर 15 क्विंटल धान का समर्पण पंचनामा बनवाया और जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। किसान ने बार-बार समझाने की कोशिश की कि शेष धान पहले ही मंडी पहुंच चुका है, लेकिन प्रशासन ने उसकी एक न सुनी।
12 घंटे मंडी में भटका किसान, समाधान शून्य
पीड़ित किसान सुबह 7 बजे मंडी पहुंचा और शाम 7 बजे तक सरकारी प्रक्रिया की भूलभुलैया में फंसा रहा। दिनभर की मशक्कत के बाद भी जब प्रशासन से कोई समाधान नहीं मिला, तो किसान ने अपना आक्रोश विधायक निवास के सामने धान रखकर जाहिर किया।
विधायक का फूटा गुस्सा: “यह सत्यापन नहीं, उत्पीड़न है”
मामले पर क्षेत्रीय विधायक अंबिका मरकाम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसान की स्थिति बेहद पीड़ादायक थी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा “धान बेचने जाते किसान को रास्ते में रोकना नियमों के खिलाफ है। सत्यापन करना है तो किसान के घर जाकर करें, सड़क पर नहीं।”विधायक ने आरोप लगाया कि उड़ीसा बॉर्डर से बड़े व्यापारी धान खपाकर आराम से निकल जाते हैं, जबकि स्थानीय किसानों को प्रशासन परेशान कर रहा है। उन्होंने तत्काल तहसीलदार और नगरी थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर मामले का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए।
आंदोलन की चेतावनी: अब चुप नहीं रहेगा किसान
विधायक ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान उग्र आंदोलन को मजबूर होगा। वहीं पीड़ित किसान ने भी साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ी तो बजरंग चौक में धान रखकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। यह मामला सिर्फ एक किसान का नहीं, बल्कि सरकारी दावों और प्रशासनिक हकीकत के बीच की खाई को उजागर करता है — जहां किसान न्याय के लिए धान ढोता हुआ सत्ता के दरवाजे तक पहुंचने को मजबूर है।



