पिता गढ़ते है ईट-पत्थर से इमारत, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना से खुशबू गढ़ेगी अपना भविष्य

SHARE:

रायपुर। आदिवासी बहुल मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के छोटे से गांव सिंगरायटोला में एक साधारण सी झोपड़ी में पल रहे सपनों को आज नई उड़ान मिली है। यहां रहने वाले निर्माण श्रमिक जयगोपाल मेश्राम रोजाना कड़ी मेहनत कर ईट-पत्थरों से इमारतें खड़ी करते हैं, लेकिन उनके दिल में हमेशा एक ही सपना रहा उनकी बेटी पढ़-लिखकर एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन जिए।

आर्थिक समस्याओं के बीच भी उन्होंने कभी अपनी बेटी कुमारी खुशबू की पढ़ाई को बोझ नहीं बनने दिया। मेहनत, लगन और पिता के सपनों के साथ खुशबू आगे बढ़ती रही। ऐसे समय में श्रम विभाग की मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना उनके परिवार के लिए आशा की किरण बनकर आई। इस योजना के अंतर्गत खुशबू को छात्रवृत्ति का लाभ मिला, जिसने उसकी पढ़ाई की राह को मजबूत और आसान बना दिया। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि एक संदेश है कि मेहनतकश श्रमिक के बच्चे भी बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने का हक रखते है। मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से कक्षा 1 से लेकर स्नातकोत्तर, पीएचडी एवं शोध कार्य तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को 1,000 से 10,000 तक की छात्रवृत्ति बिना अंकों की बाध्यता के प्रदान की जाती है। शर्त सिर्फ इतनी है कि श्रमिक अभिभावक ने पिछले एक वर्ष में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य किया हो।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में मोहला जिले को जहां 800 विद्यार्थियों का लक्ष्य मिला था, वहीं 2,856 बच्चों को योजना की स्वीकृति दी गई। यह आंकड़ा महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीदों और विश्वास का प्रतीक है, जिनके बच्चे अब शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवार रहे हैं। लगभग 357 प्रतिशत की उपलब्धि यह दर्शाती है कि शासन श्रमिक परिवारों के उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। आज खुशबू मेश्राम की कहानी हर उस श्रमिक परिवार के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को आगे बढ़ते देखना चाहता है।

Join us on:

Leave a Comment