छह दिवसीय कोया पुनेम गोंडी गाथा का समापन

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कुरूद। धर्मनगरी कुन्द के खेलमेला मैदान में 6 से 11 फरवरी तक आयोजित कोया पूनेम गोंडी गाथा कार्यक्रम के समापन दिवस पर शंकरशाह इरपाची ने कथा सुनाते हुए बताया बाबा शंभू को गोंडो ने बुड़ा देव बना दिया । बड़ा देव पंचतत्व है। बाबा शंभू को जब ज्ञान प्राप्त हुआ हो तीनो काल को जानने लगे, भुत काल, भविष्य काल, वर्तमान काल, जिससे उन्हे तिरकाल दशी कहने लगे। देवता पंच तत्व है प्रवर होती है फड़ा पेन पंच तत्व शक्ति निराकार शक्ति है, साधना बाबा शंभू ने किया था । तब शंभू को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, दोहा के माध्यम से कहा सब बन जाओगे साधू माहत्मा तो कौन करेगा किसानी, अन्न पैदा कैसे होगा, मर जायेगे संसार के सारे प्राणी दुसरो का नकल कर संन्यास धारण नहीं करना चाहिए।

उन्होंने आगे गाथा में बताया कि अग्निदेन को प्रसन्न करने के लिए मंत्र का उच्चारण नही करनी पड़ती, माचिस से अग्नि देव उत्पन्न होती है। जल देव को प्रकट करने के लिए बोर कुंआ खुदवाना पड़ता है, वायुदेव को प्रकट करने के लिए पंखा चलाना पड़ता है अंध विश्वास में लगे रहोगे तो कोई प्रकट होने वाला नहीं ,सांइस ने स्पष्ट कर दिया है। आम के पेड़ में पानी डालोगे तो समय आयेगा तो फल देगा। कार्यक्रम के अंतिम दिन कथा वाचक इरपाची जी समाज के पदाधिकारीयों एवं जन-प्रतिनिधियों की उपस्थिति में गोंड समाज के सामाजिक नियमावली का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर कमलेश सोरी अध्यक्ष केंद्रीय गोंड़ महासभा धमधागढ़, संगीता सोरी अध्यक्ष धमधागढ़ दुर्ग , नीलम चंद्राकर (पूर्व मंडी अध्यक्ष ) जिला पंचायत सदस्य, भानु चंद्राकर विधायक प्रतिनिधि ,लाकेश्वर साहू पूर्व सरपंच गोबरा, भाग्यवान मरकाम सेवा निवृत्त शिक्षक, मनहरण ठाकुर, माधुरी मंडावी, सरोज ठाकुर, शैलेन्द्री मंडावी, अर्चना नेताम, गायत्री मंडावी,चन्द्रप्रभा ध्रुव,पायल ध्रुव, चमेली नेताम, भिलाई शहर से शेष मंडावी, पुष्पा ध्रुव, भानुमति कुंजाम, मिनाक्षी मंडावी, माधव सिंह ठाकुर अध्यक्ष जिला धमतरी ,देवनाथ नेताम , डॉ. आनंद राम ठाकुर, शिव नेताम कोषाध्यक्ष., कोमल सिंह नेताम सयुंक्त सचिव, हरिचन्द्र नेताम, सयुंक्त सचिव,ईश्वरी नेताम जिला अध्यक्ष महिला प्रभाग, कुलंजन सिंह मांडवी, ललित ठाकुर, संतोष सोरी, भूपेंद्र नेताम, पोखराज नेताम, राधे मांडवी, घनश्याम कुंजाम, दीपकसोरी, सहित सैकड़ो महिला पुरुष उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन फलेंद्र ध्रुव ने किया।

भाषा ही वह सूत्र है जो समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखती है – कथावाचक तिरु शंकर शाह

मीडिया के साथ चर्चा करते हुए कथावाचक तिरु शंकर शाह ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी अपनी मूल संस्कृति और रीति-रिवाजों को भूलती जा रही है, जिसके कारण समाज में बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा ही वह सूत्र है जो समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास और गौरव से परिचित कराना है।कोया पुनेम गाथा की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि इसका हिंदी में अर्थ सत्य मार्ग है।आज समाज के कई लोग भटक कर गलत रास्तों पर जा रहे हैं। कोया पुनेम के माध्यम से हम उन्हें जीवन जीने का सही रास्ता और समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध करा रहे हैं।

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