मेचका,सोंढूर में आज से आस्था का सैलाब,भगवान भोलेनाथ के प्रतिमा की होगी प्राण प्रतिष्ठा

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हितेश महेश फाउन्डेशन द्वारा 25 फरवरी से 1 मार्च तक कराया जा रहा धार्मिक अयोजन

प्रदीप साहू @ नगरी । सप्तऋषियों की तपो स्थली धमतरी जिले का सिहावा – नगरी वनांचल क्षेत्र अपने धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण जाना जाता है, जो अपने अन्दर कई गौरवशाली विरासत को समेटे हुए है..वहीं नगरी इलाके के दूरस्थ क्षेत्र मेचका,सोंढूर गांव में घने जंगलों पहाड़ी में सप्तऋषियों में से एक मुझको मुचकुंद ऋषि का तपोस्थल है, बुजुर्ग बताते है कि जहां आज भी अभी कई जीवंत प्रमाण मौजूद है,वहीं इसी पहाड़ी और जंगलों के बीच सोंढूर जलाशय स्थित जहां की खूबसूरत प्राकृतिक नजारे को निहारने पर आंखो को खूब सुकून मिलता है,वहीं अब इस प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, बताया जा रहा है कि यहां सोंढूर जलाशय व ईको पार्क के पास सांकरा निवासी महेश फाउन्डेशन छत्तीसगढ़ द्वारा श्री महाकाल,भगवान भोलेनाथ की 40 फीट प्रतिमा का निर्माण कराया जा रहा है, जो अब पूरी तरह से बनकर तैयार है, जहां श्री मुचकुंदेश्वर महादेव जी का प्राण प्रतिष्ठा आज बुधवार 25 फरवरी से 1 मार्च तक होना है,इस दौरान यहां पांच दिनों तक कई धार्मिक कार्यक्रमों का अयोजन भी होगा।

गौरतलब है कि नगरी ब्लॉक के मेचका गांव में स्थित मुचकुंद ऋषि आश्रम और सोन्ढूर बांध सदियों से धार्मिक आस्था का केन्द्र और प्राकृतिक सुंदरता के कारण प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है,जहां अंचल सहित कई राज्यों और देश भर से पर्यटक यहां पहुंचते है.. यहां पर्यटन को बढ़ावा देने वन विभाग द्वारा ईको पार्क भी बनाया गया है, घने जंगलों और ऊंचे पर्वतों के बीच स्थित सोंढूर बांध के चारों ओर प्राकृतिक मनोरम दृश्य देखते ही बनता है,जो पर्यटकों को अपने ओर आकर्षित करने के लिए काफी है, यहां उड़ीसा, बस्तर सहित प्रदेश के कई जिलों से छुट्टी के दिनों सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जहां पर्यटन को बढ़ावा देने जिला प्रशासन द्वारा नौका विहार से लेकर होम गेस्ट हाउस व पर्यटक स्थल के रूप मे विकसित किया जा रहा है, जिसकी देखरेख समिति द्वारा की जायेगी।

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