प्रदीप साहू @ नगरी । ग्राम पंचायत सांकरा आज एक नई पहचान की ओर बढ़ चला है। यहां के बांध में पारंपरिक खेती से हटकर ‘सफेद सोना’ कहे जाने वाले मखाना की खेती की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। इस अभिनव पहल ने न सिर्फ कृषि के क्षेत्र में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की मजबूत राह भी खोल दी है।
कार्यक्रम का दृश्य उत्साह और उम्मीदों से भरा रहा, जब स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपने हाथों से मखाना के बीज बांध में डाले। यह सिर्फ बीजारोपण नहीं, बल्कि उनके उज्जवल भविष्य की नींव रखने जैसा प्रतीत हुआ।
इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि सांकरा में शुरू हुई यह पहल क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से 17 स्व सहायता समूहों की लगभग 200 महिलाएं सीधे जुड़ी हैं, जिन्हें स्थायी रोजगार मिलने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। “यह केवल खेती नहीं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का अभियान है,” उन्होंने जोर देते हुए कहा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए उनके द्वारा स्वयं के व्यय से तालाब का निर्माण कराया गया। साथ ही इस विषय को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए Shivraj Singh Chouhan को भी प्रस्ताव भेजा गया था। उनके धमतरी दौरे के दौरान मखाना से बनी पुष्पमाला पहनाकर इस योजना की विशेष जानकारी दी गई थी।
योजना के तहत सांकरा बांध के लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में मखाना की खेती की परिकल्पना की गई है, जिसमें फिलहाल 25 से 30 एकड़ में इसकी शुरुआत की गई है। क्षेत्र में पहली बार हो रही इस खेती को लेकर ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य एवं वन सभापति अजय ध्रुव, जनपद उपाध्यक्ष हृदय साहू, जनपद सदस्य राजेश नाथ गोसाई, प्रेमलता नागवंशी, सरपंच नागेंद्र बोरझा, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष गिरवर भंडारी जनमेजय साहू न बृजभूषण साहू जनक राम साहू , स्व सहायता समूह की महिलाओं सहित कई जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। सांकरा की यह शुरुआत आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन सकती है।



