रायपुर। आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने लोरमी में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले आप कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की आवाज को दबाने की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है।
जायसवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक, जो लोरमी निवासी हैं, जो पार्टी में छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी थे उनके द्वारा भाजपा में शामिल होकर दलबदल किया गया। इस राजनीतिक घटना से आहत आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लोरमी में लोकतांत्रिक मर्यादा के भीतर रहकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि पुलिस ने उन्हीं कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कर दी है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
शांतिपूर्ण विरोध भी अब अपराध बना दिया गया है
उत्तम जायसवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का आक्रोश स्वाभाविक और जायज था। संदीप पाठक ने जिस तरह भाजपा का दामन थामा, वह जनता और कार्यकर्ताओं के विश्वास के साथ छल है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना जनता का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन छत्तीसगढ़ में अब इस अधिकार को भी कुचला जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव के इशारे पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। यह साफ दिखाता है कि छत्तीसगढ़ सरकार आम आदमी की आवाज से डरी हुई है। सरकार विरोध को संवाद से नहीं, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई से दबाना चाहती है।
कार्यकर्ताओं के पीछे छत्तीसगढ़ की जनता खड़ी है
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है, वे अकेले नहीं हैं। उनके पीछे छत्तीसगढ़ की जनता और आम आदमी पार्टी का हर कार्यकर्ता मजबूती से खड़ा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि यह एफआईआर तत्काल प्रभाव से वापस ली जाए।
उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने के लिए उनके साथ ज्यादती कर सकती है। उन्होंने कहा कि तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं कि कार्यकर्ताओं की पिटाई की जाएगी और फिर उन्हें जबरन जेल भेजा जाएगा। यदि ऐसा कोई अन्याय हुआ तो आम आदमी पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
राजनीतिक मुकदमों से हमें डराया नहीं जा सकता
उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पहले भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर अनेक राजनीतिक प्रकरण दर्ज किए हैं। कई मामले जनआंदोलनों से जुड़े हुए हैं। आम आदमी पार्टी वह राजनीतिक दल है, जिसने विधानसभा तक जाकर जनता की आवाज उठाई और उसके लिए भी कार्यकर्ताओं को मुकदमों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद भी आम आदमी पार्टी ने राजनीतिक प्रकरणों को वापस लेने की मांग की थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने भी इस दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों आम जनता की आवाज उठाने वालों से डरती हैं।
अन्याय के खिलाफ आम आदमी पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा
अभिषेक मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जहां भी अन्याय होगा, आम आदमी पार्टी के क्रांतिकारी साथी वहां पहुंचकर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालतों के चक्कर काटने से आम आदमी पार्टी डरने वाली नहीं है। हम न डरेंगे, न झुकेंगे और न ही जनता के अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटेंगे।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ आम जनता के हक, न्याय और सम्मान के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। जिन क्रांतिकारी साथियों पर एफआईआर दर्ज हुई है, उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पार्टी उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
छत्तीसगढ़ियों की आवाज दबाने की हर कोशिश का जवाब मिलेगा
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवलाल नरेटी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ियों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सरकार यह समझ ले कि आवाज को एफआईआर से नहीं दबाया जा सकता। दमन से आंदोलन कमजोर नहीं होता, बल्कि और मजबूत होता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल एफआईआर वापस नहीं ली, तो आम आदमी पार्टी प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाएगी।



