धमतरी। जिले में स्थित ऐतिहासिक मुरूमसिल्ली जलाशय में लगातार बारिश के चलते जलस्तर बढ़ने लगा है। जलाशय में पर्याप्त जलभराव होते ही बांध का ऐतिहासिक सायफन स्पिलवे सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से एक्टिव हो गया और गेट खुलने के साथ ही अतिरिक्त पानी स्वयं नहर की ओर डिस्चार्ज होने लगा है, यह नजारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
दरअसल, बीते करीब दो दिनों से धमतरी जिले के कैचमेंट इलाके में लगातार बारिश हो रही है। जिसके कारण जिले के सभी प्रमुख गंगरेल,सोंढूर और दुधावा जलाशयों में पानी की आवक बढ़ रही है। वहीं मुरूमसिल्ली जलाशय का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा और जलभराव की स्थिति बनने के बाद बांध में लगे सायफन सिस्टम ने काम करना शुरू कर दिया। सिस्टम के सक्रिय होते ही अतिरिक्त पानी स्वतः बाहर निकलने लगा।
रविवार को बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटक
बताया जा रहा है कि आज रविवार का दिन होने के कारण मुरूमसिल्ली बांध और आसपास की प्राकृतिक वादियों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। बारिश के बाद घने जंगलों, हरियाली से घिरी पहाड़ियां, जलाशय में बढ़ता पानी और सायफन से निकलता पानी लोगों के लिए आकर्षण का खास केंद्र बना हुआ है। पर्यटक खूबसूरत नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते भी नजर आ रहे हैं।
करीब 100 साल पुराना है मुरूमसिल्ली बांध
जानकारी के मुताबिक, मुरूमसिल्ली जलाशय को माडमसिल्ली बांध के नाम से भी जाना जाता है। यह धमतरी जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दक्षिण दिशा में,मुरूमसिल्ली-भोथापारा क्षेत्र के पास स्थित है। यह क्षेत्र जिले के वनांचल नगरी विकासखंड के अंतर्गत आता है,बताया जाता है कि इस बांध का निर्माण 1914 से 1923 के बीच ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था। करीब एक सदी पुराने इस बांध का निर्माण मुख्य रूप से सिंचाई और जल प्रबंधन के उद्देश्य से किया गया था।
सायफन स्पिलवे है बांध की सबसे बड़ी खासियत
मुरूमसिल्ली बांध की सबसे बड़ी विशेषता इसका सायफन स्पिलवे सिस्टम है। जलस्तर निर्धारित स्तर तक पहुंचने के बाद यह सिस्टम स्वतः सक्रिय होकर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। यही ऐतिहासिक तकनीक मुरूमसिल्ली बांध को देश ही नहीं, बल्कि एशिया की महत्वपूर्ण पुरानी जल संरचनाओं में विशेष पहचान दिलाती है,बारिश के मौसम में जब सायफन सिस्टम सक्रिय होता है और पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकलता है, तो यह दृश्य देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं।









