मुर्गी-खरगोश पालन से शुरू हुआ स्वरोजगार का सफर, आज परिवार संभालने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार का माध्यम बनीं सफीना

धमतरी। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत कहानी है । मगरलोड विकासखण्ड के सुदूर वनांचल क्षेत्र में रहने वाली  सफीना बानो की कहानी केवल संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों के बीच हौसला बनाए रखने और अवसर मिलने पर अपनी जिंदगी को नई दिशा देने की प्रेरणादायी मिसाल है।

पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई। बुजुर्ग माता की देखभाल, अपनी बच्ची की परवरिश और घर-परिवार का खर्च—इन सभी जिम्मेदारियों का भार अकेले उनके कंधों पर था। रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक कठिनाइयों के बीच कई बार उन्हें लगा कि शायद जिंदगी यहीं थम गई है।

इसी दौरान उनकी मुलाकात सेक्टर पर्यवेक्षक  झामिन बिन्झेकर से हुई। सफीना ने अपनी परिस्थितियां और मन की पीड़ा उनके सामने साझा की। श्रीमती बिन्झेकर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अकेली नहीं हैं। विभाग और उसकी योजनाएं उनके साथ हैं। उन्होंने सफीना को सक्षम योजना की जानकारी दी और उनके भीतर छिपी आगे बढ़ने की दृढ़ इच्छा को पहचानते हुए स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन किया।

सफीना की इच्छा को देखते हुए श्रीमती बिन्झेकर ने उनके घर पहुंचकर व्यवसाय के लिए 2 लाख रुपये के ऋण हेतु आवेदन भरवाया। दिसंबर 2025 में ऋण राशि स्वीकृत हुई। यह राशि सफीना के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपने को साकार करने का अवसर थी।

उन्होंने मिले सहयोग का उपयोग करते हुए मुर्गी पालन और खरगोश पालन का व्यवसाय शुरू किया। छोटी-सी शुरुआत धीरे-धीरे आगे बढ़ती गई। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने उनकी राह आसान की। आज उनके फार्म में सैकड़ों मुर्गियां हैं और खरगोश पालन से भी उन्हें आय प्राप्त हो रही है।

सफीना ने यहीं रुकना स्वीकार नहीं किया। समय के साथ उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण कार्य भी शुरू किया। नए व्यवसाय ने उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया। अब वे अपनी माता की दवाइयों और देखभाल का खर्च, घर की जरूरतें तथा अपनी बच्ची की पढ़ाई बेहतर ढंग से पूरी कर पा रही हैं।

सबसे बड़ा बदलाव उनकी सोच और आत्मविश्वास में आया है। जो महिला कभी परिस्थितियों के आगे स्वयं को असहाय महसूस करती थी, आज वही अपने फैसले स्वयं ले रही है और दूसरों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रही है।

सफीना भावुक होकर कहती हैं—“दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम मांगने आते हैं।”

यह बदलाव किसी एक दिन में नहीं आया। इसके पीछे सफीना का साहस, निरंतर मेहनत और सही समय पर मिला विभागीय सहयोग है। सक्षम योजना ने उन्हें केवल आर्थिक संबल नहीं दिया, बल्कि अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करने का आत्मविश्वास भी दिया।

सफीना की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब हौसले को अवसर, मेहनत को मार्गदर्शन और संघर्ष को सहयोग मिलता है, तो परिस्थितियां बदलना संभव है। उनकी यात्रा आज अन्य महिलाओं के लिए भी संदेश है—आत्मनिर्भरता की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज तक पहुंच सकता है।

 

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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