धमतरी। भारतीय किसान संघ धमतरी जिला शासन प्रशासन के किसानों के द्वारा विभिन्न प्रकार के नियम कानून लगाकर प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं। पहले एग्री स्टेक के नाम पर मानसिक प्रताड़ना एवं आर्थिक रूप से शोषण किया गया। उसके बाद अब प्रशासनिक रूप से राजस्व अमले के माध्यम से पीवी ऐप के माध्यम और पटवारी के माध्यम से फसलों का भौतिक सत्यापन करवाने के नाम पर किसान एवं पटवारी को आपस में लड़ाने का काम करने लगा है, इसीलिए पटवारी का हड़ताल जारी है जो वास्तविक रूप से सही है।
सरकार की नजर में किसान अपने खेतों में फसल लगाकर बहुत बड़ी गलती कर बैठा है, वह सरकार की नजर में सबसे बड़ा बेईमान है। ऐसा साबित करने में लगा हुआ है। आज तक ऋण पुस्तिका के माध्यम से धान खरीदी होते आया है। जिसमें किसी प्रकार का परेशानी नहीं हुआ लेकिन अब सरकार किसान को ही चोर समझने लगा है। वर्तमान में धान खरीदी ऋण पुस्तिका राजस्व रिकार्ड के आधार पर हो। प्रशासन के द्वारा सोसाइटी में रकबा काम करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जो किसानों के साथ अन्याय हैं। यदि आपके पास खरीदने की क्षमता नहीं है तो धान ना खरीदे लेकिन किसानों को प्रताड़ित करना बंद करें।
धमतरी जिले में प्रती एकड़ धान का औसत उत्पादन 28 क्विंटल है। उसमें दबाव बनाया जा रहा है। किसान इस प्रकार की प्रताड़ना का जमकर विरोध करें। रकबा समर्पण के लिए इस प्रकार दबाव बनाना उचित नहीं है। भारतीय किसान संघ शासन प्रशासन के किसानों के खिलाफ गलत नीति का किसानों के हित में जमकर विरोध करेगा। किसानों के हर सुख दुख में साथ साथ मिलकर लड़ेगा। जिलाध्यक्ष लालाराम चंद्राकर ने शासन प्रशासन की इस प्रकार की नीति का जमकर विरोध किया है।










