अर्नब तूफान ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, सिवनीकला सहित सिर्री अंचल के 40 से अधिक गांवों में फसल तबाही

50 से 60 प्रतिशत तक धान की फसल पानी में डूबी, कर्ज के बोझ तले दबे किसानों ने मुआवजा और कर्जमाफी की मांग की

पामेश देवांगन @ सिर्री। अर्नब तूफान के कहर ने सिर्री अंचल के किसानों की उम्मीदों और सालभर की मेहनत में पानी फेर दिया है। खेतों में लहलहाती और पककर कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल अब पानी में डूबी हुई है। ग्राम सिवनीकला सहित सिर्री अंचल के 40 से अधिक गांवों में तूफान और लगातार बारिश के चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है।प्रारंभिक तौर पर किसानों का कहना है कि कई क्षेत्रों में 50 से 60 प्रतिशत तक धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब चुकी है। खेतों में भरे पानी के बीच किसानों की आंखों के सामने उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद हो रही है।

प्रभावित गांवों में सिर्री, खर्रा, दर्रा, फुसेरा, धूमा, परसठी, चिंवरी, संकरी, गोजी, मौरीकला, कठौली, नारी, चारभाठा, कोकड़ी, गुदगुदा, सिरसिदा, मौरीखुर्द, दहदहा, कुहकुहा, भरदा, भैसमूंडी, बकली, रावनगुड़ा, सिवनीकला, परसवानी, मेडरका, भोथली, चरमुडिया, भालूकोना, गोबरा, अछोटी, अटंग, आलेखुंटा, कोड़ेबोड़, मरौंद, भाठागांव, सोनपुर, नवागांव, थूहा एवं गातापार सहित आसपास के गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है।

खेतों में पानी, घरों में चिंता और किसानों के सामने कर्ज चुकाने की चुनौती

सिवनीकला सरपंच लता जितेश्वर ध्रुव ने बताया कि किसानों के लिए यह नुकसान केवल धान की फसल खराब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, जुताई और सिंचाई में किसान पहले ही हजारों रुपये खर्च कर चुके हैं। कर्ज में डूबे हुए हैं। किसानों ने कर्जमाफी की मांग के साथ ही साथ सरकार से फसल बीमा कंपनी से नुकसान का जल्द मुआवजा राशि दिलाने की मांग भी की है।

सिवनीकला के जनपद सदस्य टेकराम साहू और उपसरपंच दीपदान साहू सहित किसान खिलावन चंद्राकर, पुरुषोत्तम पटेल, कृष्णा तारक, अवध, रामेश्वर साहू, बोधन, भोज ने बताया कि अधिकांश किसानों ने खेती के लिए साहूकारों, समितियों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया है। फसल तैयार होने के समय आई इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी आर्थिक उम्मीदों को तोड़कर रख दिया है। अब वह कैसे कर्ज चुका पाएंगे और कैसे परिवार का खर्च चला पाएंगे। उन्होंने बताया कि कर्जमाफी और मुआवजा राशि नहीं दिलाने की स्थिति में मांग को लेकर सभी किसान आंदोलन करने पर मजबूर हैं।

सिर्फ सर्वे नहीं, किसानों को समय पर राहत और वास्तविक मुआवजा चाहिए

टकेश्वर चंद्राकर, छबि पाल, ओमप्रकाश, डा. सुरेश तारक, गिरधर, लोमश, शीतल ने कहा कि प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले को सामान्य बारिश से हुए नुकसान के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे किसानों की आजीविका पर आए गंभीर प्राकृतिक आपदा के रूप में लिया जाए। प्रत्येक प्रभावित गांव में राजस्व, कृषि एवं संबंधित विभागों की संयुक्त टीम भेजकर तत्काल खेतों का भौतिक निरीक्षण कराया जाए। फसल नुकसान का पारदर्शी और निष्पक्ष सर्वे कराकर वास्तविक क्षति का आकलन किया जाए तथा पात्र किसानों को शासन के प्रावधानों के अनुसार शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

किसानों की यह भी मांग है कि जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनके कृषि ऋण की वसूली पर नियमानुसार तत्काल राहत दी जाए। प्रभावित किसानों को ब्याज में राहत, ऋण पुनर्गठन और पात्रता के अनुसार कर्जमाफी पर भी सरकार गंभीरता से निर्णय ले। इसके साथ ही फसल बीमा कराने वाले किसानों के दावों का शीघ्र निराकरण कर बीमा राशि दिलाने की व्यवस्था की जाए।

 

सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी, क्या किसानों तक समय पर पहुंचेगी राहत?

आज सिर्री अंचल के किसानों को आश्वासन से अधिक ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। खेतों में डूबी फसल के साथ किसानों की उम्मीदें भी डूबती नजर आ रही हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान की भरपाई किसान अपने दम पर नहीं कर सकते। ऐसे में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशीलता दिखाते हुए बिना देरी किए राहत की प्रक्रिया शुरू करें। अब किसानों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत केवल नुकसान का आंकड़ा तैयार करने की नहीं, बल्कि हर प्रभावित किसान तक न्यायपूर्ण राहत पहुंचाने की है। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल सर्वे, उचित मुआवजा, कृषि ऋण में राहत और कर्जमाफी की मांग पर ठोस पहल करे, ताकि खेतों में बर्बाद हुई फसल के साथ किसानों का भविष्य भी पूरी तरह बर्बाद होने से बचाया जा सके।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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