magarlod : फर्जी आधार, ऋण पुस्तिका, बैंक पास बुक और सील बनाने वाले ठेकेदारों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही पुलिस?

पुलिस प्रार्थी को आर टी आई के तहत सुरक्षा का हवाला देकर नहीं दिया सीसीटीवी फुटेज

प्रार्थी अब उच्च न्यायालय,सीएम, डीजीपी, आईजी रायपुर से सुनायेंगे अपनी व्यथा

40 लाख की धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड गिरोह आजाद घूम रहे हैं

 मगरलोड।   पुलिस कहती है कानून की नजर में कोई बच नहीं सकता, लेकिन धमतरी मगरलोड पुलिस के हाथ इन शातिर जालसाजों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले ठेकेदारों तक क्यों नहीं पहुंच रहे?’

40 लाख धोखाधड़ी से पीड़ित सचिन बंगानी फर्जी आधार कार्ड, जाली ऋण पुस्तिका और फर्जी बैंक पासबुक बनाने वाले मुख्य सप्लायरों को पुलिस कब तक मास्टरमाइंडों पर मेहरबानी रहेगी।

मगरलोड पुलिस 9 मई 2026 को मतलब 110 दिन एफआईआर के बाद इस 40 लाख धोखाधड़ी के बड़े गिरोह के छोटे मछली ठाकुर राम साहू उर्फ राजू सोंगा वि ख मगरलोड एवं जितेंद्र कुमार साहू पोखरा राजिम को पकड़ी और एफ आई आर 77/2026 में नामजद लोग जो फर्जी ऋण पुस्तिका आधार कार्ड बैंक पास बुक शील अन्य दस्तावेज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वह आजाद घूम रहा है 20 अगस्त को सिर्फ दो मोहरों की ही गिरफ्तारी अब तक की गई है।

इस गिरोह में शामिल लोग जिसमें दो व्यक्ति का रायपुर के आमानाका थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 432/2024 ने क्रिमिनल सिंडिकेट की पोल खोल दी है मुख्य साजिशकर्ता भुनेश्वर देवांगन, युगलकिशोर देवांगन, अमित शर्मा और अभिषेक अब भी आजाद घूम रहे हैं जिसका एफ आई आर में नामजद है।

आरटीआई (RTI) में बड़ा खुलासा हुआ है पीड़ित प्रार्थी सचिन बंगाणी ने बताया कि मगरलोड पुलिस को थाने परिसर का सीसीटीवी फुटेज जुलाई के 13 समय 11से दोपहर 2 बजे तक, 21को शाम 6 से 8 बजे तक एवं 23 जुलाई के दोपहर 2 से4 बजे तक सीसीटीवी फुटेज की जानकारी मांगी गई लेकिन पुलिस ने 6 बिंदुओं में सुरक्षा एवं सुप्रीम कोर्ट हवाला देते हुए सीसीटीवी फुटेज नहीं दिया गया और ना ही अपराध क्रमांक 77/2026 की जानकारी दी जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय परम वीरसिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह एवं अन्य विशेष अनुमति याचिका क्रिमिनल संख्या 2403/2020 विधिक निर्देश बिंदु 19 में (पीड़ितों का मानव अधिकार और फुटेज का विधिक अधिकार) यदि किसी नागरिक या पीड़ित को संदेह है कि थाने के भीतर जांच में हेरफेर की जा रही है मानव अधिकार का हनन हो रहा है या आरोपियों को अनुचित विधिक संरक्षण मिल रहा है तो वह मानव अधिकार आयोग या माननीय न्यायालय न्यायालयीय मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत कर उस फुटेज को तुरंत सुरक्षित और हासिल करने का कानूनी अधिकार रखता है हालांकि मगरलोड पुलिस ने कानून का 6 बिंदुओं का हवाला एवं सुरक्षा की दृष्टि से देखते हुए सीसी फुटेज नहीं दी लेकिन प्रार्थी को संदेह है कि उक्त समय पर आरोपियों का आना-जाना लगा रहा जिसके कारण सीसीटीवी फुटेज की मांग की गई है।

पीड़ित ने इस बात को अपने या वकील के माध्यम से कोर्ट से याचिका कर गुहार लगाने की कोशिश करने की बात कर आशंका जताई है कि आरोपियों को विधिक लाभ पहुंचाने और पुलिस की साठगांठ को छुपाने के लिए थाने के सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने का प्रयास ना किया जाए जि सकी उन्हें संदेह है।
मगरलोड पुलिस पर इस सुस्त कार्यप्रणाली इस दावे पर गंभीर सवालिया निशान खड़ी कर रही है। कपड़ा व्यवसायी सचिन बंगानी से फर्जी दस्तावेजों के सहारे ₹40,00,000 (चालीस लाख रुपये) की सनसनीखेज ठगी के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज हुए 110 दिन (4 महीने) से अधिक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद पुलिस इस अंतर-जिला क्रिमिनल सिंडिकेट के मुख्य मास्टरमाइंडों भुनेश्वर देवांगन, युगलकिशोर देवांगन, अमित शर्मा और अभिषेक शर्मा उर्फ राहुल को गिरफ्तार करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और रायपुर कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी पुलिस इन रसूखदार ठगों और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले मुख्य ठेकेदारों को खुला संरक्षण दे रही है।फर्जी आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका और बैंक पासबुक बनाने वाले ठेकेदारों पर पुलिस आखिर क्यों मेहरबान है?इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और काला पक्ष यह है कि पुलिस उन मुख्य अपराधियों/ठेकेदारों तक पहुंचने की कोशिश ही नहीं कर रही है, जो इस सिंडिकेट को फर्जी आधार कार्ड, नकली ऋण पुस्तिका, जाली सरकारी सील (Stamps) और फर्जी बैंक पासबुक बनाकर सप्लाई करते हैं। पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि बिना किसी रसूखदार सरकारी संरक्षण या बड़ी साठगांठ के इतने हूबहू नकली सरकारी दस्तावेज और सील तैयार करना मुमकिन नहीं है। पुलिस ने केवल दो छोटे मोहरों को पकड़कर केस को दबाने का प्रयास किया है, जबकि फर्जी आधार कार्ड और पासबुक छापने वाले मुख्य ठेकेदारों को जानबूझकर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है ताकि इस बड़े जाल साजो का पर्दाफाश न हो सके।

रायपुर आमानाका थाने की FIR 432/2024 से हुआ बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला कानूनी मोड़ तब आया जब इस सिंडिकेट का पुराना आपराधिक इतिहास सामने आया। इनमें से युगल किशोर देवांगन एक अन्य के खिलाफ रायपुर के आमानाका पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 432/2024 (FIR 432/2024) के तहत भी जालसाजी, कूटरचना और धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज है। आमानाका थाने की इस एफआईआर से यह साफ प्रमाणित होता है कि यह गिरोह आदतन अपराधी है, जो अलग-अलग जिलों में फर्जी दस्तावेज और मृत व्यक्तियों के नाम पर जमीनों का फर्जी सौदा कर लाखों करोड़ों रुपये की ठगी करता है। इतने पुख्ता आपराधिक रिकॉर्ड और रायपुर कोर्ट के कड़े रुख के बावजूद पुलिस का इन्हें गिरफ्तार न करना गहरी साठगांठ की ओर इशारा करता है।
DCB बैंक की कुर्रा शाखा का महा-कारनामा इस पूरे 40 लाख के घोटाले में डीसीबी बैंक (DCB Bank) की कुर्रा शाखा की भूमिका भी पूरी तरह संदिग्ध होने का संदेह है। इस शातिर क्रिमिनल सिंडिकेट ने ठगी की रकम को खपाने के लिए डीसीबी बैंक में एक मृत व्यक्ति के नाम पर और पूरी तरह से जाली दस्तावेजों के सहारे खाता खुलवा लिया। बैंक प्रबंधन ने बिना किसी जमीनी वेरिफिकेशन या उचित केवाईसी (KYC) नियमों का पालन किए आंखें मूंदकर खाता संचालित होने दिया। पीड़ित ने इस बैंकिंग धोखाधड़ी के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोकपाल में शिकायत दर्ज करने की तैयारी बताया और मांग की है कि बैंक के संबंधित अधिकारियों को भी इस आपराधिक षड्यंत्र का सह-आरोपी बनाया जाए।नोटरी कृत इकरारनामे में खुद कबूला था गुनाह मामला धमतरी जिले के ग्राम सोंगा स्थित 1.70 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है, जिसे आरोपियों ने अपना बताकर पीड़ित से बयाना 40 लाख राशि हड़प ली । जालसाजी पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने 06 अप्रैल 2026 को सरकारी नोटरी के समक्ष एक विधिक इकरारनामा (Agreement Deed) निष्पादित किया था। इस विलेख के बिंदु क्रमांक 5 में आरोपियों ने लिखित में स्वीकार किया था कि उनके द्वारा प्रस्तुत समस्त ऋण पुस्तिका व दस्तावेज पूरी तरह “कूटरचित व फर्जी” हैं और उन्होंने पीड़ित के साथ छल-कपट किया है। उन्होंने वचन दिया था कि वे 05 मई 2026 तक पूरी रकम वापस लौटा देंगे, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद वे भूमिगत हो गए।
प्राथी सचिन बंगाणी ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर लिया है मुख्यमंत्री और डीजीपी से कड़ा रुख की गुहार लगायेंगे।
मगरलोड स्थानीय पुलिस की ढीली कार्रवाई भी कई संदेहास्पद इशारे करती है। पीड़ित पक्ष ने अब पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच, फर्जी दस्तावेज छापने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई, और थाने के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग करेंगे।
पीड़ित का कहना है कि “हमारा न्यायपालिका और कानून पर पूरा भरोसा है। पुलिस के हाथ वाकई लंबे होते हैं, और हम इन रसूखदार ठगों व उनके मददगारों को सलाखों के पीछे भिजवाकर ही दम लेंगे
लेकिन इस 40 लाख की धोखाधड़ी में आम जनता जानना चाहती है कि पुलिस इस गिराेह का पर्दाफाश करने में इतनी सुस्त चाल क्यों लगा रही है क्या की इस गिरोह के साथ जुड़े लोग की बड़ी राजनीतिक पकड़ है या कोई बड़ी दबाव या कोई बड़ी तगडी कृपा है लोगों के मन में यह चर्चा का विषय है।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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