नीति आयोग राष्ट्रीय कार्यशाला: उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

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रायपुर…. राजधानी रायपुर में आयोजित नीति आयोग की राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला के दूसरे और तीसरे तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता में मेंटरशिप की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए मेंटरशिप मॉडल को समय की आवश्यकता बताया।

द्वितीय तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा को सुलभ और समावेशी बनाने में मेंटरशिप की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। दोपहर बाद आयोजित दूसरे सत्र की अध्यक्षता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. संजय कुमार और सह-अध्यक्षता आईआईएम लखनऊ की प्रोफेसर पुष्पेंद्र प्रियदर्शी ने की। इस सत्र में उच्च शिक्षा में मेंटरशिप ढाँचे के परिदृश्य का अन्वेषण, सर्वाेत्तम प्रथाओं की पहचान और कमजोर समूहों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में एक सुदृढ़ मेंटरशिप ढाँचा तैयार करने हेतु सुझाव प्रस्तुत किया गया।

द्वितीय सत्र में नियामक परिप्रेक्ष्य में मेंटरशिप का विकास और संवर्धन विषय पर डॉ. जी.एस. चौहान, संयुक्त सचिव, यूजीसी ने व्याख्यान दिया। मेंटरशिप में प्रौद्योगिकी का लाभ पर एआईसीटीई के सलाहकार एवं सदस्य सचिव डॉ. मोरे रामुलु ने अपनी प्रस्तुति दी।

इसी प्रकार  मेंटरशिप में सर्वाेत्तम अभ्यास और नवाचार – केरल से प्रमुख सीख विषय पर आयुक्त, केरल सरकार डॉ अरुण एस नायर, उच्च शिक्षा में मेंटरशिप पहल पर संस्थापक एवं सीईओ अशोका फेलो सुश्री अरुंधति गुप्ता, मेंटरशिप में अंतर्राष्ट्रीय सर्वाेत्तम अभ्यास भारत के लिए सीख विषय पर यूनेस्को के शिक्षाविज्ञ श्री जियान शी तेंग ने अपने विचार रखे।

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