धमतरी। भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन और भगवान शिव के गले में नागराज वासुकी का विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। इसी आस्था से जुड़ा धमतरी शहर के हटकेश्वर वार्ड स्थित प्राचीन नाग मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक केंद्र बना हुआ है।
धमतरी के हटकेश्वर वार्ड में स्थित इस प्राचीन नाग मंदिर को करीब 11वीं शताब्दी पुराना बताया जाता है। मंदिर में स्थापित प्राचीन नाग प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
नाग पंचमी के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। धमतरी के अलावा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां नाग देवता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों में इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि नाग देवता इस क्षेत्र की रक्षा करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मंदिर के आसपास सर्पदंश से अब तक किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। हालांकि, यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है, जिसका स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन इस मंदिर में नाग देवता के विशेष दर्शन होते हैं। श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।
कई भक्तों का मानना है कि मंदिर में पूजा करने से सर्प भय और मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते नाग पंचमी के अलावा पूरे साल मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।









