प्रदीप साहू @ नगरी । विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगरी में आदिवासी समाज की एकजुटता, संस्कृति और सामुदायिक शक्ति का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। जिला स्तरीय कार्यक्रम में धमतरी जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे शामिल हुए। नगरी का मंडी प्रांगण लोगों से खचाखच भरा रहा और दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने वक्ताओं के जोशीले संबोधन के साथ जमकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम की शुरुआत नगरी के राजाबाड़ा स्थित दंतेश्वरी मंदिर से हुई, जहां से आदिवासी समाज के लोगों ने रैली के रूप में कार्यक्रम स्थल मंडी प्रांगण तक पहुंचकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी रैली ने पूरे नगर में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
रेला-पाटा नृत्य ने मोहा दर्शकों का मन
कार्यक्रम में आदिवासी समाज के बच्चों और युवाओं ने आकर्षक पारंपरिक वेशभूषा में रेला-पाटा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों के बीच कलाकारों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को मंच मिला।
मुख्य वक्ता जितेंद्र मीणा ने अधिकारों को लेकर किया सचेत
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से पहुंचे जितेंद्र मीणा ने आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक हक और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन में आदिवासी समाज के समक्ष मौजूद विभिन्न चुनौतियों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया।
उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है और उनके जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों को समझना होगा और अपने हितों से जुड़े विषयों पर जागरूक होकर आवाज उठानी होगी।
जितेंद्र मीणा ने जनगणना में आदिवासी समाज की पहचान और संबंधित कॉलम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आदिवासी समाज के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, जिन्हें लेकर अभी से सजग होने की आवश्यकता है।
उन्होंने टाइगर रिजर्व और वन संरक्षण के नाम पर विस्थापन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि विकास और संरक्षण की योजनाओं के बीच आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों और उनके अस्तित्व से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी समाज को आत्ममंथन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से विधायक और सांसद चुने जाने के बाद भी यदि समाज के मूल मुद्दों को मजबूती से नहीं उठाया जाता और समस्याओं के विरोध में प्रभावी आवाज नहीं आती, तो समाज को इस स्थिति को समझने और सवाल करने की आवश्यकता है।
सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति को पूजता आया है। हमारे पूर्वजों ने अन्याय के खिलाफ हमेशा संघर्ष किया और जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। आज आवश्यकता है कि हम अपने पूर्वजों के संघर्ष को याद करें और उनके बताए रास्ते पर चले।
उन्होंने कहा कि जिले के सीतानदी क्षेत्र में टाइगर रिजर्व के नाम पर कई गांवों को विस्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इसके खिलाफ समाज को कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि नगरी क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है और यहां दो बड़े गांवों को नगर पंचायत बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसका भी समाज की ओर से विरोध किया जाएगा।
हजारों की मौजूदगी में दिखी सामाजिक एकजुटता
विश्व आदिवासी दिवस के इस जिला स्तरीय आयोजन में धमतरी जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर महिला, पुरुष, युवा और बच्चों की भारी भीड़ रही। पूरे मंडी प्रांगण में आदिवासी समाज की एकजुटता और उत्साह नजर आया।
आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने वाले बच्चों और प्रतिभाओं को मंच पर सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। वक्ताओं ने समाज के बच्चों और युवाओं को शिक्षा, जागरूकता और अपने अधिकारों की जानकारी हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
पारंपरिक संस्कृति के साथ अधिकारों की आवाज
कार्यक्रम में एक ओर जहां आदिवासी समाज ने अपनी पारंपरिक संस्कृति, वेशभूषा और लोकनृत्य के माध्यम से अपनी पहचान को मजबूती से प्रदर्शित किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने समाज में शिक्षा, एकता और जागरूकता को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने के साथ-साथ वर्तमान समय की चुनौतियों को समझना भी जरूरी है।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। रैली से लेकर सभा स्थल तक पुलिस बल की तैनाती रही। यातायात व्यवस्था और कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा को लेकर पुलिस जवान मुस्तैद नजर आए, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।









