Dhamtari: ग्राम सभाओं के हाथों में होगी जंगलों के प्रबंधन की कमान

10 ग्राम सभाओं का चयन, प्रत्येक CFR समिति को मिलेंगे ₹15 लाख
कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा—वन संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन को दें प्राथमिकता

धमतरी। सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग में स्थानीय समुदाय की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में धमतरी जिले में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ग्राम सभाओं को उनके सामुदायिक वन संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपते हुए वन संरक्षण को ग्रामीण आजीविका और स्थानीय विकास से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बैठक में जिला पंचायत एवं समिति के सदस्य टीकाराम कंवर,  अजय ध्रुव,  गरिमा नेताम एवं डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव, उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व के डीएफओ  वरुण जैन, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग  विमल साहू सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

इसी क्रम में आज कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सामुदायिक वन संसाधन (CFR) क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण, CFR प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने तथा वन संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में CFR अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले की 10 ग्राम सभाओं का चयन किया गया। चयनित ग्राम सभाओं के अंतर्गत गठित प्रत्येक सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFRMC) को वन प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिए ₹15 लाख की राशि स्वीकृत की जाएगी। संबंधित समितियों को अपने क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों, वन संसाधनों, जैव विविधता और ग्रामीण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत सामुदायिक वन प्रबंधन योजना (Management Plan) तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी।

तकनीकी एवं सामाजिक सहयोग के लिए दो संस्थाओं का अनुमोदन

ग्राम सभाओं और CFRMC को जमीनी स्तर पर आवश्यक तकनीकी एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए बैठक में दो अशासकीय संस्थाओं (NGOs) को कार्य के लिए अनुमोदित किया गया। ये संस्थाएं ग्राम सभाओं के साथ समन्वय कर वन प्रबंधन योजना तैयार करने, स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा स्वीकृत गतिविधियों के प्रभावी संचालन में सहयोग करेंगी।

वन संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन पर जोर

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार केवल वन संरक्षण की व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग में सहभागी बनाने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को अपने अधिकारों और दायित्वों की स्पष्ट जानकारी देते हुए CFRMC को प्रभावी एवं सक्रिय बनाया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित ग्राम सभाओं के लिए तैयार की जाने वाली प्रबंधन योजनाएं केवल कागजी दस्तावेज न होकर स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध वन संसाधनों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित व्यावहारिक कार्ययोजना हों। इसमें वन संरक्षण के साथ वनोपज के बेहतर प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों को भी शामिल किया जाए।

कलेक्टर ने कहा कि वन बचेंगे तो गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इसलिए लघु वनोपज, औषधीय पौधों, प्राकृतिक संसाधनों और अन्य वन आधारित गतिविधियों के टिकाऊ उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए।

जैव विविधता संरक्षण और सतत उपयोग बनेगा आधार

बैठक में बताया गया कि चयनित ग्राम सभाओं के लिए तैयार होने वाली प्रबंधन योजनाओं में वन संरक्षण, पुनर्जीवन, जैव विविधता संवर्धन, जल एवं मृदा संरक्षण, वन संसाधनों का सतत उपयोग तथा स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण प्रमुख रूप से शामिल किया जाएगा। साथ ही वनोपज के वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की संभावनाओं को भी योजना में स्थान दिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को वन संसाधनों से बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

ग्राम सभा के अधीन कार्य करेगी CFRMC

सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति (CFRMC) ग्राम सभा के अधीन कार्य करने वाली स्थानीय समिति है। वन अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त सामुदायिक वन क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता की रक्षा तथा वनोपज के न्यायसंगत और सतत उपयोग में समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय समुदाय को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाते हुए वन संसाधनों के संरक्षण और उनके टिकाऊ उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना है।

कलेक्टर ने बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए तथा प्रत्येक चरण में ग्राम सभा की सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन तभी सफल होगा, जब वन संरक्षण, ग्राम सभा की भागीदारी और ग्रामीणों की आजीविका—इन तीनों को एक साथ लेकर आगे बढ़ा जाए। इससे एक ओर वन एवं जैव विविधता का संरक्षण मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदायों के लिए आय एवं रोजगार के स्थायी अवसर भी विकसित होंगे।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

Leave a Comment