आधुनिक प्रबंधन से बढ़ेगा राज्य में मछली उत्पादन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के समृद्ध जल संसाधनों और जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की विशाल संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा आईसीएआर-सीआईएफआरआई बैरकपुर (कोलकाता) के सहयोग से रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तालाबों और केज कल्चर में मछली पालन कर रहे किसानों को मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान (रियल-टाइम डायग्नोस्टिक्स) और उनके प्रभावी बचाव व इलाज के आधुनिक तरीकों से अवगत कराना था।

वैज्ञानिकों द्वारा दी गई तकनीकी मार्गदर्शन

कार्यशाला में आईसीएआर-सीआईएफआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा तथा  सोहिनी चटर्जी ने विस्तृत व्याख्यान दिए। उन्होंने किसानों को केज कल्चर और तालाबों में होने वाली बीमारियों के लक्षण, रोकथाम तथा उनके वैज्ञानिक उपचार की बारीकियों से अवगत कराया।

किसानों और अधिकारियों की व्यापक सहभागिता

इस दो दिवसीय आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसान और 50-60 पारंपरिक (तालाब) मत्स्य पालक शामिल हुए। इसके साथ ही विभिन्न जिलों के मत्स्य अधिकारियों ने भी कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी निभाई।

भविष्य की रणनीतियों पर मंथन

कार्यशाला में चर्चा के दौरान राज्य में मत्स्य पालन के बेहतर प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं की पहचान की गई। फील्ड लेवल जांच, खेत और जलस्रोतों के स्तर पर ही बीमारियों की त्वरित पहचान करने की दिशा में भी चर्चा की गई।
प्रशिक्षण एवं डेटाबेस मैदानी कर्मचारियों को रोग रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण देना तथा भविष्य के प्रबंधन हेतु जलाशयों व मछलियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डेटाबेस तैयार करने की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए इस प्रकार के एकीकृत प्रबंधन को बेहद जरूरी बताया।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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