धमतरी @ विश्वनाथ गुप्ता। धमतरी के यातायात व्यवस्था में ऑनलाइन व्यवस्था के नही होने से बाहरी प्रदेश के वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है , उन्हे नगदी रकम के लिए चवाईस सेंटरों के चक्कर लगाने पड़ रहे ,,वही फिर से महाराष्ट्र,,सहित अन्य प्रदेश की गाड़ियों का लोड फिर ,,, कम छमता वाले सड़को को कर रहा छतिग्रस्त ,, जिम्मेद्दारो की चुप्पी रहस्यमई
हम बताते चले बीते दिनों यातायात थाना क्षेत्र में एक बहुत ही अजीब वाक्य देखने को मिला जिसमे एक ,,बाहरी प्रदेश के वाहन चालक को नगदी रकम ढूंढने के लिए 5 घंटे भटकना पड़ा ,,,कारण था यातायात थाने में ऑनलाइन व्यवस्था नहीं हो पाना ,, एक तो दूसरे प्रदेश की गाड़ी और फिर समय की बर्बादी,,
इस पर व्यवस्था देख रहे यातायात पुलिस भी सिर्फ मुख दर्शक बनी रही ,,और वाहन चालक पैसे के लिए भटकता रहा,,उसके पास ऑनलाइन पैसे की। व्यवस्था तो थी लेकिन थाने में नगदी व्यवस्था उपलब्ध थी ,,
कानूनी कार्यवाई अपनी जगह सही है लेकिन अगर ऑनलाइन व्यवस्था होती तो उस गाड़ी चालक को चालान पटाने में मिनटों लगते और वो अपने आगे के कार्य में आगे बड़ सकता था
दूसरी तरफ ध्यान दिया जाए तो उस वाहन चालक को एक भला मानस मिल गया ,,शारदा खरे नमक जिसकी सहायता से उसे इस परेशानी से निकलने में मदद मिली ,,भले ही 5 घंटे लग गए ,,उसने उसे नाश्ता भी कराया जो सुबह से ही भूखा था और परेशान भी
ऑनलाइन व्यवस्था मशीन तो विभाग के पास है लेकिन प्रयोग के समय जो व्यवस्था काम न आए वो किसी काम की नही,,,
दूसरी ओर रात दिन भारी वाहनों की दौड़ की वजह से ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्र के कम भार छमता वाले सड़को पर भारी वाहनों के चलने से ,,बड़े बड़े गड्ढे बन गए है जिससे ,,आए दिन दुर्घटना बड़ते चली जा रही है और जिम्मेदार चुप बड़ा सवाल,, रेत रेत खेल रहे ये लोग क्यों बाज नहीं आ रहे कौन है इस काले खेल के पीछे ,,,,जिसे प्रशासन दो चार गाड़ियों पर कार्यवाई कर मौन बैठ जाता है कब जागेगा ,खनिज विभाग
फिलहाल दोनो हालात यही बयां कर रहे की जो चल रहा है चलने दो जवाब किसको देना है ,, अगर कोई बड़ी घटना घटती है तो सिर्फ ,,दो मिनट का भाषण ही तो देना है
संवेदना व्यक्त कर टाटा बाय बाय वाली स्थिति दिख रही।








