नवागांव निवासी पियन साहू (55) का अचानक निधन हो गया था। वह तलाकशुदा थीं और
अपने भाई के साथ रहती थीं। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की, लेकिन ग्रामीणों और समाज के लोगों ने कहा कि अंतिम संस्कार गांव और समाज की परंपरा के अनुसार किया जाना चाहिए।
मृतका के भाई उमेश साहू ने बताया कि उनका परिवार करीब 8 साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था। ग्रामीणों और समाज के लोगों का आरोप था कि परिवार पिछले कुछ वर्षों से समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार होने वाले कार्यक्रमों में शामिल नहीं होता था। इसी बात को लेकर अंतिम संस्कार के दौरान विवाद की स्थिति बनी।
ग्रामीणों का कहना था कि गांव में किसी व्यक्ति की मौत होने पर पूरा गांव अंतिम संस्कार की तैयारियों
में सहयोग करता है। इसके लिए लकड़ी समेत अन्य जरूरी सामान जुटाया जाता है और समाज के लोग भी अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं। परिवार के समाज से अलग रहने के कारण इस बार सहयोग और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर विवाद हुआ।
विवाद बढ़ने के बाद सरपंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और समाज के प्रमुख लोगों ने परिवार के साथ बैठक की। कई घंटे तक चली बातचीत के बाद परिवार ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई।
बैठक में परिवार ने आगे से गांव और समाज के कार्यक्रमों में शामिल होने की बात भी कही,
इसके बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों की मौजूदगी में महिला का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया।
सहमति के बाद परिवार को समाज में दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कराई गई। इसके बाद नारियल फोड़ा गया, प्रसाद बांटा गया और गंगाजल का छिड़काव किया गया। परिवार के सदस्यों को तुलसी का पत्ता भी खिलाया गया।









