18 वर्ष की उम्र में ट्रेन हादसे में गंवाया था दायां हाथ, शिविर में डेढ़ से दो घंटे में मिला कृत्रिम हाथ
वर्षों के संघर्ष के बाद आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम, चेहरे पर लौटी खुशी और आत्मविश्वास
धमतरी। कभी-कभी किसी व्यक्ति के जीवन में छोटा-सा सहयोग भी बदलाव की बड़ी वजह बन जाता है। वर्षों से एक हाथ के अभाव में रोजमर्रा के कार्यों के लिए संघर्ष कर रहे ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू के जीवन में भी ऐसा ही बदलाव आया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर में उन्हें महज डेढ़ से दो घंटे के भीतर कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराया गया। लंबे समय से जिस सुविधा की उन्हें आवश्यकता थी, वह समय पर मिली तो उनके चेहरे पर खुशी और मन में नई उम्मीद दिखाई देने लगी। तेजराम के लिए यह कृत्रिम हाथ केवल एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की दिशा में एक नई शुरुआत है।
एक हादसा, जिसने बदल दी जीवन की राह
तेजराम साहू की जिंदगी में उस समय बड़ा बदलाव आया, जब महज 18 वर्ष की उम्र में ट्रेन से गिरने के कारण उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गंभीर चोट के चलते चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। कम उम्र में हुए इस हादसे के बाद उनके सामने रोजमर्रा के कार्यों को करने से लेकर आजीविका के लिए मेहनत करने तक अनेक चुनौतियां खड़ी हो गईं।
हाथ का अभाव उनके लिए केवल शारीरिक कठिनाई नहीं, बल्कि जीवन के अनेक सामान्य कार्यों में अतिरिक्त प्रयास करने की मजबूरी भी था। इसके बावजूद तेजराम ने हिम्मत नहीं हारी। परिस्थितियों से जूझते हुए उन्होंने जीवन की राह पर आगे बढ़ना जारी रखा। अब कृत्रिम हाथ मिलने से उन्हें अपने दैनिक कार्यों को अधिक सहजता से करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की नई उम्मीद मिली है।
‘निदान-03’ शिविर ने जरूरत को समझा, समय पर उपलब्ध कराया सहायक उपकरण
सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य जनकल्याणकारी सेवाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के साथ उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इसी भावना के अनुरूप जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
शिविर में दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं के अनुरूप कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में तेजराम साहू की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने उनके हाथ का माप लिया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद उन्हें डेढ़ से दो घंटे के भीतर कृत्रिम हाथ उपलब्ध करा दिया गया।
समयबद्ध प्रक्रिया और जरूरत के अनुरूप मिली सहायता ने तेजराम के लिए वर्षों की कठिनाई के बीच नई संभावना के द्वार खोल दिए। उनके लिए यह अनुभव इस बात का उदाहरण बना कि जब शासकीय प्रयासों के साथ संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय होता है, तो सहायता का लाभ सीधे व्यक्ति के जीवन तक पहुंचता है।
“यह सिर्फ हाथ नहीं, मेरी संपूर्णता का परिचायक है”
कृत्रिम हाथ मिलने पर भावुक तेजराम साहू ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा, “यह हाथ सिर्फ हाथ नहीं है, बल्कि मेरी संपूर्णता का परिचायक है। इससे अब मेरे जीवन की राह आसान होगी। मैं अपने कामों को भी कर पाऊंगा।”
तेजराम के ये शब्द उनके वर्षों के संघर्ष, नई उम्मीद और आत्मनिर्भर बनने की आकांक्षा को व्यक्त करते हैं। कृत्रिम हाथ मिलने से उनके मन में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि अब वे अपने कई दैनिक कार्यों को पहले की तुलना में अधिक आसानी से कर सकेंगे। यह बदलाव उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
सेवा संकल्प अभियान की सार्थकता, सहायता से आत्मसम्मान तक
तेजराम साहू की कहानी सेवा संकल्प अभियान के मानवीय पक्ष को सामने लाती है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराना केवल एक सुविधा प्रदान करना नहीं, बल्कि उसके जीवन में संभावनाओं को विस्तार देना भी है। ‘निदान-03’ शिविर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जहां दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
तेजराम को कृत्रिम हाथ मिलना इस बात का उदाहरण है कि समय पर मिली सहायता किसी व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार कर सकती है। उनके लिए यह नई शुरुआत है—अपने काम स्वयं करने की आकांक्षा, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संकल्प और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की उम्मीद।
तेजराम के चेहरे पर खिली मुस्कान सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को साकार करती है, जिसमें जनसेवा का वास्तविक अर्थ जरूरतमंद के जीवन को सरल बनाना, उसकी क्षमताओं को संबल देना और उसे आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।









