धमतरी @ विश्वनाथ गुप्ता। धमतरी में भी सोनम वांगचुक के समर्थन में जनजागरण सेवा समिति के बैनर तले कई युवाओं और उद्योगपति सही कई युवा नेताओ नेभी गांधी मैदान में 1दिवसीय धरना प्रदर्शन में भाग लिया ,,और सबका सवाल यही था की शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन में तानाशाही रवैया अपना कहा तक सही ,,लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है इतने बड़े पैमाने पर लोग अगर एक मंच पर सिर्फ शिक्षा की सही नीति के लिए खड़े है और रोकथाम चाहते है निष्पक्ष जांच चाहते है तो इसमें बुराई क्या ,,
एक समय था जब दामन में जरा सा कीचड़ भी लग जाए तो लोग तुरंत कपड़े बदल लेते थे की दाग कैसा भी हो सही नही ,,वैसा ही राजनीति में भी होता था की ,,अगर आरोप लग रहे है तो नेता मंत्री अपने पद से इस्तीफा देकर जांच पूरी होने का इंतजार करते थे
लेकिन ये कैसी विडंबना है की लोग अब संवाद विकल्प में भी काम नही करना चाहते
वही कुछ बुद्धि जीवी और वरिष्ठ समाज सेवी लोगो का कहना ये भी है की देश में हजारों घोटाले हुए ,,कई सांप्रदायिक दंगे हुए,,दिल्ली में नर संहार हुआ ,,पुलिस जवान को चाकुओं से गोद कर मार डाला गया लेकिन सोनम वांगचुक ने उस समय भूख हड़ताल नही किया ,,क्यों सारे वो चेहरे काकरोच पार्टी का उस समय समर्थन कर रहे जब ,,दो देशों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है और कई देश इसकी चपेट में आ कर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई से जूझ रहे है ,,क्या ये राष्ट्र प्रेम है या व्यक्तिगत लाभ का नया मुखौटा….
सवाल ,,तो बनता है सोनम बेवफा या सरकार ताना शाह









