धमतरी @ विश्वनाथ गुप्ता…. धमतरी जिला घड़ियालों से भर चुका प्रतीत होता है यहां जो भी आता है घड़ियाली आंसू बहा कर चल देता है और जो यहां स्थाई घड़ियाल है वो यदा कदा रोते गाते ही रहते है
2016 से शुरू हुई थी ये कहानी की रूद्री से अंबेडकर चौक तक गंगरेल बांध,,आवागमन को सरल और सहज बनाने रूद्री से अंबेडकर चौक तक फोरलेन बनाया जायेगा,, जो की शहर में बढ़ते यातायात भार को राहत पहुचायेगा ,खासकर पर्यटन छेत्र गंगरेल के आने जाने वाले पर्यटकों के लिए,,फिर क्या था जैसे ही यहां जुमला थैले से बाहर आया भू माफियाओ ने इस रोड पर चल रहे अपने पहले के खेल में और जान फूक दी,,रोड के आजू बाजू खेती जमीन को लेकर को अवैध प्लाटिंग की थी उसके रेट को जमीन से उठा कर आसमां तक पहुंचा दिया ,,जो रेट ग्राम पंचायत एरिया होने के कारण महज 300 से 500 तक था उसका आज रेट 5000 से 8000 रूपये फिट हो गया है हालाकि गाईड लाइन अभी भी 500 से 1000 ही होगी
और यही असल वजह है यहां फोर लेन नही बनने की
क्यों की जिसे काम करना होता है उसे अमल में लाने से पहले ही ऐसे छेत्र में बेन लगाने का काम करते है की रोड किनारे जो शासकीय भूमि संरक्षित होती है उसे सबसे पहले सुरक्षित किया जाए ,लेकिन यहां तो तत्कालीन ग्राम पंचायत के सरपंचों और सचिवों से मिलकर एक ऐसा खेल चला की जिसकी सजा रूद्री ग्राम पंचायत न जाने कब तक भुगते गा,,पूरा रूद्री ग्राम पंचायत खेतो की हरियाली से लहलहाता था जहां अब हर तरफ अब अवैध प्लाटिंग ही नजर आयेगा और ये सब भ्रष्ट अधिकारियों की ही बदौलत है इसमें मीडिया की चुप्पी भी शामिल है जिसमे मैं भी शामिल हूं क्योंकि सिस्टम में रहोगे तभी जी पाओगे नही तो वक्त के पन्नो के साथ पलट दिए जाओगे वाली कहानी है
तो रूद्री रोड फोर लेन बनने से रहा ये बात अब धमतरी की जनता को समझ लेना चाहिए क्यों की बात है करोड़ो की को व्यापारी वर्ग जो जमीन का काम करते है जिसे हम भू माफिया कहते है लेकिन है तो व्यापार ,,सही हो या गलत ये तो व्यापार है जो चलता ही रहेगा ,लेकिन अगर वाकई में कोई काम करना चाहे तो अब भी कुछ नही बिगड़ा है रोड के आजू बाजू,, अब भी शासकीय भूमि बची हुई है जिसे जितनी जल्दी संरक्षित ,सुरक्षित कर चौड़ीकरण का काम तो किया ही जा सकता है और लोगो की जान सुरक्षित की जा सकती है
ध्यान देने योग्य बातें इस छेत्र में 25 से अधिक कॉलोनी स्थित है 15 से ऊपर स्कूल स्थित है जहां रोजाना सुबह बच्चे ,डर डर कर स्कूल जाते है की कही कोई दुर्घटना न हो जाए ,परिवार चिंता में रहता है की बच्चा आज सायकल में गया है कुछ हो न जाए ,, मां चिंता में ,पत्नी चिंता ,बच्चे चिंता में की घर का चिराग बुझ न जाए लेकिन नतीजा सिर्फ है कागजों की नाव चलाना छोड़ हकीकत में काम जरूरी ,,और अगर अब भी जु नही रेंग रही है तो आने वाला समय और भी आसंकाओ को जन्म दे रहा क्योंकि ,,, जन जन के सेवको को अगर ये लग रहा की जन ता तो बेवकूफ है उसे चावल ,और महतारी चंदन योजना में मशगूल रख कुछ भी नवा अचार लाते रहो और प्लेट से बिस्किट भस्काते रहो तो ऐसा करने वाला और सोचने वाला आने वाले समय के लिए निश्चित तौर पर अपना बोरिया बिस्तर बांध कर रखे …



