सुप्रीम कोर्ट बोला : महिला अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन की हकदार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) पर कार्यरत महिला अधिकारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव को स्वीकार करते हुए उन्हें तीन प्रमुख राहतें दी हैं। जिन महिला SSC अफसरों को 2020-21 में सिलेक्शन बोर्ड या आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसले से पहले ही स्थायी कमीशन (Permanent Commission) मिल चुका है, उनका स्टेटस अब नहीं बदला जाएगा।

जो महिला अफसर इस केस की लड़ाई के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पूर्ण पेंशन और सभी रिटायरमेंट लाभ दिए जाएंगे। हालांकि उन्हें पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा। अभी सेवा में जो महिला अफसर हैं, उन्हें 60% कटऑफ पूरा करने पर स्थायी कमीशन मिलेगा, बशर्ते अन्य जरूरी मंजूरी पूरी हो। यह आदेश JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (आर्मी एजुकेशन कोर) में काम करने वाली महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा।

चीफ जस्टिस की बेंच ने आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि Annual Confidential Report (ACR) कई बार पुरुषों की सोच के आधार पर लिखी गईं, जिससे महिलाओं की मेरिट प्रभावित हुई। महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश दिए।

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