धमतरी…. एक ओर जहां रोजगार की तलाश में गांवों से शहरों की ओर पलायन लगातार बढ़ रहा है, वहीं धमतरी जिले का एक गांव ऐसा भी है, जहां लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक का गाड़ाडीह गांव आज आत्मनिर्भरता, जनसहयोग और आधुनिक सोच का ऐसा उदाहरण बन चुका है, जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं विदेशों तक पहुंच रही है. ईटीवी भारत की टीम ने इस गांव की जमीनी पड़ताल की है.
इरिगेशन सिस्टम ने बदल दी तस्वीर
करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव के अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं. गांव में प्रवेश करते ही चारों ओर लहलहाते धान के खेत, पानी से भरे तालाब और समृद्धि की तस्वीर दिखाई देती है. यहां के किसानों की सबसे बड़ी ताकत है गांव में तैयार किया गया लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम, जिसने पूरे गांव की तस्वीर बदल दी.
मॉडल गांव बना गाड़ाडीह
गांव के 21 युवाओं और किसानों ने मिलकर एक ऐसी पहल शुरू की, जिसने गाड़ाडीह को मॉडल गांव बना दिया. समिति के सदस्यों ने पांच-पांच लाख रुपए एकत्रित कर शुरुआत की और किसानों के सहयोग से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि जुटाकर पैरी नदी से सरफेस वाटर के माध्यम से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम तैयार किया.
इस कार्य में गांव के किसानों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया. करीब 250 किसानों में से 40 किसानों ने 40 से 50 हजार रुपए तक का आर्थिक सहयोग दिया. आज उन्हीं किसानों को दोनों फसलों के लिए आजीवन मुफ्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है.








