रायपुर। छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके कुछ पूर्व नक्सली नेता अब लोकतांत्रिक राजनीति के जरिए अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना में रह रहे सरेंडर माओवादी नेताओं ने बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों पर फोकस करते हुए एक नए राजनीतिक दल के गठन की रणनीति बनाई है। उनका दावा है कि अब वे जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर चुनावी राजनीति के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाएंगे।
जानकारी के मुताबिक, पूर्व माओवादी नेता थिपरी तिरूपति उर्फ देवजी, बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात, पूलुरी प्रसाद उर्फ चंद्रना और सुजातका उर्फ पदमा इस पहल की अगुवाई कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के पुनर्वास केंद्रों में रह रहे कुछ आत्मसमर्पित नक्सलियों से भी उनका लगातार संपर्क बना हुआ है। बताया जा रहा है कि गूगल मीट और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से नियमित बैठकें कर आगामी रणनीति तैयार की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं का फोकस दलित और आदिवासी वोट बैंक पर है। वे पर्चों और जनसंपर्क अभियान के जरिए लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि इन गतिविधियों में हथियार या हिंसा का कोई जिक्र नहीं किया जा रहा है।
दूसरी ओर, पूर्व सीसी सदस्य जम्पन्ना ने भी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी बनाने की घोषणा की है और सोशल मीडिया के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों के पुनर्वास केंद्रों में बड़ी संख्या में आत्मसमर्पित नक्सली रह रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के पुनर्वास केंद्रों में करीब 2,948 पूर्व नक्सली हैं, जबकि तेलंगाना में भी बड़ी संख्या में पूर्व माओवादी मौजूद हैं।









