पशु सखियों को मिला वैज्ञानिक पशुपालन का प्रशिक्षण, ग्रामीण पशुपालकों तक पहुंचाएंगी उन्नत तकनीकें

धमतरी। जिले में पशुधन विकास एवं ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत बड़ौदा आरसेटी में प्रशिक्षणरत पशु सखियों का शैक्षणिक भ्रमण जिला स्तरीय हिमीकृत वीर्य एवं तरल नत्रजन वितरण केंद्र तथा जिला रोग प्रयोगशाला, मुजगहन में कराया गया। भ्रमण का उद्देश्य पशु सखियों को पशुधन विकास विभाग की तकनीकी गतिविधियों, पशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा आधुनिक पशुपालन प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

भ्रमण के दौरान पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को हिमीकृत वीर्य (फ्रोजन सीमेन) के सुरक्षित संरक्षण, तरल नत्रजन के भंडारण एवं वितरण प्रणाली, कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया तथा नस्ल सुधार कार्यक्रमों की जानकारी दी। बताया गया कि उन्नत नस्ल के पशुओं के विकास और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए कृत्रिम गर्भाधान एक प्रभावी माध्यम है, जिसके सफल संचालन में गुणवत्तायुक्त हिमीकृत वीर्य एवं तरल नत्रजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इस अवसर पर डॉ. टी.आर. वर्मा ने पशु सखियों को पशुपालन एवं पशु पोषण प्रबंधन, पशुओं में होने वाले सामान्य रोगों की पहचान, टीकाकरण, कृमिनाशन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, बधियाकरण तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पशु सखियां गांव-गांव में पशुपालकों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

प्रशिक्षणार्थियों ने जिला रोग प्रयोगशाला का भी अवलोकन किया, जहां उन्हें पशुओं में रोग निदान की प्रक्रिया, नमूनों की जांच तथा रोग नियंत्रण संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई। साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण एवं समय पर उपचार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पशु सखियां पशुपालकों और विभाग के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करेंगी। उन्हें आधुनिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान करने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन विकास को नई गति मिलेगी तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। जिला प्रशासन पशुपालन आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने के लिए सतत प्रयासरत है।”

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने विभागीय अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से संवाद कर विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। इस प्रशिक्षण एवं भ्रमण से पशु सखियों का ज्ञान और कौशल विकसित होगा, जिससे वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर मार्गदर्शन एवं सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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