जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा ने की प्रस्तावित सामुदायिक शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम की समीक्षा
विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर होगा चयन, अधिगम परिणामों में सुधार पर विशेष जोर
धमतरी। जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित मानव संसाधन को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वय से प्रस्तावित ‘सामुदायिक शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम’ की समीक्षा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने जिला पंचायत सभाकक्ष में की। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
श्री नाहटा ने कहा कि विद्यालय की वास्तविक आवश्यकता और बच्चों के सीखने के स्तर को केंद्र में रखकर स्थानीय प्रशिक्षित एवं सक्रिय सामुदायिक कैडर की सेवाओं का उपयोग अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी नियमित शिक्षक का स्थानापन्न नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने में सहयोगी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को विद्यालयवार शिक्षक उपलब्धता, रिक्त पद, विद्यार्थी संख्या, कक्षावार एवं विषयवार शिक्षकीय आवश्यकता का तथ्यात्मक आकलन कर प्राथमिकता वाले विद्यालयों की सूची तैयार करने तथा चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। प्रथम प्राथमिकता ऐसे विद्यालयों को प्रस्तावित है, जहां स्वीकृत पदों के विरुद्ध शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद शिक्षकीय मानव संसाधन की कमी, विशेष विषय अथवा कक्षा में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता तथा दूरस्थ एवं कठिन भौगोलिक क्षेत्र के विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पढ़ने-लिखने और गणितीय दक्षता पर विशेष फोकस
प्रस्तावित सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी विद्यार्थियों के पढ़ने-लिखने एवं गणित की बुनियादी दक्षताओं को विकसित करने, कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण, पुस्तकालय एवं पठन गतिविधियों, स्थानीय भाषा आधारित शिक्षण, खेल-कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों तथा अभिभावक एवं समुदाय से शैक्षणिक संवाद में सहयोग कर सकेंगे। विशेष रूप से कक्षा 1 से 8 तक विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार को प्रमुखता दी जाएगी।
सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगियों के चयन के लिए स्थानीय स्तर पर समिति गठित करने का प्रस्ताव है, जिसमें शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायत, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति तथा बिहान के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी। प्राथमिक शालाओं के लिए न्यूनतम 12वीं तथा माध्यमिक शालाओं के लिए न्यूनतम स्नातक योग्यता प्रस्तावित है। संबंधित विषय में योग्यता, बच्चों के साथ कार्य का अनुभव, स्थानीय भाषा एवं बोली का ज्ञान तथा शिक्षक प्रशिक्षण जैसी योग्यताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
गुणवत्ता और बाल सुरक्षा पर रहेगी कड़ी निगरानी
श्री नाहटा ने कार्यक्रम में बाल सुरक्षा एवं शैक्षणिक गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। चयनित सहयोगियों को बाल अधिकार, बाल संरक्षण, विद्यालय सुरक्षा तथा शारीरिक एवं मानसिक दंड निषेध से संबंधित आवश्यक अभिमुखीकरण दिया जाएगा।
विद्यालय स्तर पर मासिक तथा संकुल स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ने-लिखने की क्षमता, गणितीय दक्षता और विषयगत अधिगम में सुधार का आकलन किया जाएगा। प्रथम चरण में चयनित विद्यालयों में कार्यक्रम को प्रायोगिक परियोजना के रूप में लागू कर उसके परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर आगामी चरणों में विस्तार का निर्णय लिया जा सकेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी ने बताया कि पहल का उद्देश्य विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकीय संसाधनों के साथ स्थानीय प्रशिक्षित मानव संसाधन को जोड़कर विद्यार्थियों को अतिरिक्त, आवश्यकता-आधारित और समुदाय-सहभागिता पर केंद्रित शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह व्यवस्था नियमित शिक्षक भर्ती अथवा पदस्थापना का विकल्प नहीं होगी। नियमित शिक्षक पदों पर भर्ती एवं पदस्थापना शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार ही होगी तथा सामुदायिक शैक्षणिक सहयोगी के रूप में कार्य करने से नियमित शासकीय सेवा अथवा नियमितीकरण का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा।









