तालाबों के साथ खेतों में भी संभव है मखाना की खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन से ग्रामीण महिलाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए अवसर
धमतरी। कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में मखाना उत्पादन तकनीक एवं प्रसंस्करण विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत बोड़रा की सरपंच सुमन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण में जिले की 40 महिला कृषकों ने भाग लेकर मखाना की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण एवं इससे जुड़ी उद्यमिता की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की।
मुख्य अतिथि सुमन साहू ने कहा कि मखाना की खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का एक बेहतर माध्यम बन सकती है। कम भूमि एवं उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग कर इस फसल को आयवर्धक गतिविधि के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने महिला कृषकों से प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहार में अपनाने तथा अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह ने बताया कि मखाना की खेती अब केवल तालाबों तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयुक्त तकनीक एवं प्रबंधन के माध्यम से खेतों में भी इसका सफल उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धमतरी जिले में उपलब्ध तालाबों, जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों को देखते हुए मखाना उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके माध्यम से कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के साथ किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. दीपिका चंद्रवंशी ने मखाना उत्पादन के लिए उपयुक्त जलवायु एवं भूमि, तालाब एवं खेत आधारित उत्पादन प्रणाली, उन्नत बीजों का चयन, नर्सरी तैयार करने, पौध रोपण, फसल प्रबंधन, कटाई एवं बीज संग्रहण की वैज्ञानिक विधियों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने मखाना के प्राथमिक प्रसंस्करण की जानकारी देते हुए बीजों की सफाई, ग्रेडिंग, सुखाने, भूनने तथा पारंपरिक एवं यांत्रिक विधियों से मखाना पॉपिंग की तकनीक समझाई। उन्होंने तापमान नियंत्रण, नमी प्रबंधन एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने में बरती जाने वाली सावधानियों पर भी प्रकाश डाला।
वैज्ञानिक डॉ. शक्ति वर्मा ने मखाना फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी। वहीं श्री प्रेमलाल साहू ने क्षेत्र में मखाना उत्पादन की संभावनाओं, पोषक तत्वों के उचित प्रबंधन एवं जल प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं से किसानों को अवगत कराया।
कार्यक्रम में बताया गया कि मखाना केवल एक पारंपरिक खाद्य उत्पाद ही नहीं, बल्कि पोषण एवं व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद है। इसकी खेती के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन को जोड़कर ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्यम विकसित किए जा सकते हैं। विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मूल्य संवर्धन की गतिविधियां संचालित कर अतिरिक्त रोजगार एवं आय के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान महिला कृषकों ने मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न तकनीकी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा भविष्य में भी किसानों को इस नवाचारी एवं संभावनाशील कृषि गतिविधि से जोड़ने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं प्रायोगिक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. नेहा गॉडवे, रितिका ठाकुर, आशीष बंजारे सहित कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य प्रतिनिधि एवं धमतरी जिले की 40 महिला कृषक उपस्थित रहीं।







