गेहूं में कीट व खरपतवार नियंत्रण हेतु समसामयिक सलाह

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रायपुर…. प्रदेश में गेहूं की बुवाई का कार्य अंतिम चरण में हैं अभी भी कुछ इलाकों में किसानों द्वारा गेहू की बोवाई की जा रही है। कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल में कीट, रोग एवं खरपतवार की समस्या देखी जा रही है, इसे दृष्टिगत रखते हुए कृषि विभाग द्वारा गेहूं फसल को कीट एवं खरपतवार से बचाने हेतु किसानों को सम-सामयिक सलाह दी गई है।

कृषि विभाग के अनुसार देरी से बोई गई फसलों में दीमक का प्रकोप अधिक पाया जाता है, जो फसल को नुकसान पहुंचाता है। दीमक एवं अन्य कीटों से बचाव के लिए बीज उपचार अत्यंत प्रभावी उपाय है। इसके लिए बीज को क्लोरोपाइरीफॉस 0.9 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायोमेथोक्साम 70 डब्ल्यूएस 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा फिप्रोनिल (रीजेंट 5 एफएस) 0.3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित करने की सलाह दी गई है। समय पर बोई गई फसल में यदि दीमक का आक्रमण दिखाई दे, तो सिंचाई करना लाभदायक रहता है।

कम जुताई वाले खेतों में गुलाबी तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक होता है। कीट दिखाई देने पर किनालफॉस (ईकालक्स) 800 मिली प्रति एकड़ की दर से पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। संकरी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण हेतु क्लोडिनाफॉप 15 डब्ल्यूपी 160 ग्राम प्रति एकड़ अथवा पिनोक्साडेन 5 ईसी 400 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करें। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण के लिए 2,4-डी ई 500 मिली प्रति एकड़ या मेटसल्फ्युरॉन 20 डब्ल्यूपी 8 ग्राम प्रति एकड़ उपयोगी है।

इसके अतिरिक्त संकरी एवं चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवार नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्युरॉन 75 डब्ल्यूजी 13.5 ग्राम प्रति एकड़ अथवा सल्फोसल्फ्युरॉन $ मेटसल्फ्युरॉन मिश्रण 16 ग्राम प्रति एकड़ पहली सिंचाई से पूर्व या 10-15 दिन बाद छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वैकल्पिक रूप से मेसोसल्फ्युरॉन $ आयोडोसल्फ्युरॉन 3.6 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी 160 ग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग किया जा सकता है। किसानों से अपील की गई है कि वे समय पर उचित नियंत्रण उपाय अपनाकर गेहूं फसल को कीट एवं खरपतवार से सुरक्षित रखें, जिससे बेहतर उपज प्राप्त हो सके।

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