कुरूद…. मैं, योगेन्द्र देवांगन, ग्राम सिर्री, विकासखंड कुरूद, जिला धमतरी का निवासी एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का संभाग अध्यक्ष, अपने गांव की जमीन, पर्यावरण, शासकीय खनिज संपत्ति और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर अवैध मुरुम उत्खनन के विरुद्ध आवाज उठाता रहा हूं।
ग्राम सिर्री में भारी मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अवैध खनन का कार्य संचालित किया जा रहा था। यह कार्य सामान्य स्तर का नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। मेरे द्वारा प्रमाण सहित शिकायत किए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मशीनों को सील किया। मशीनों का सील होना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गांव में अवैध खनन का कार्य वास्तव में चल रहा था और इसमें कई लोग संलिप्त थे।
मेरे गंभीर आरोप हैं कि इस पूरे प्रकरण में ग्राम का सरपंच मुख्य भूमिका में है। आरोप है कि वह कमीशन के आधार पर अवैध खनन का संचालन करवा रहा था तथा ग्राम की भूमि और शासकीय खनिज संपत्ति का सौदा किया जा रहा था। यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि ग्राम की सामूहिक संपत्ति को निजी लाभ के लिए बेचने का प्रयास प्रतीत होता है।
इसके अतिरिक्त रामायण पटेल नामक व्यक्ति गाड़ियों को लीज पर संचालित कराने, अवैध वसूली करने, मशीनों के संचालन में सहयोग देने तथा खनन माफिया के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मेरी जानकारी एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह व्यक्ति पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक एवं सरगना प्रतीत होता है। इस संबंध में मेरे पास दस्तावेज, परिस्थितिजन्य प्रमाण एवं तथ्य उपलब्ध हैं, जिन्हें मैं एंटी करप्शन ब्यूरो, पुलिस प्रशासन एवं जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु तैयार हूं।
एंटी करप्शन एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग
चूंकि इस प्रकरण में एक लोक सेवक (सरपंच) पर पद के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, इसलिए मैं इस पूरे मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो, पुलिस अधीक्षक, SDM, कलेक्टर एवं खनिज विभाग को औपचारिक रूप से सौंप रहा हूं।
मेरी मांग
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया जाए
अवैध खनन में शामिल सभी व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए
आर्थिक लाभ एवं कमीशन की जांच की जाए
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जांच की जाए
मेरे आर्थिक एवं व्यक्तिगत नुकसान की बात
अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण मुझे व्यक्तिगत, सामाजिक एवं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
मेरे कार्य प्रभावित हुए
मेरी आय पर प्रतिकूल असर पड़ा
मुझे मानसिक उत्पीड़न सहना पड़ा
मुझे दबाव में लाने के लिए नोटिस जारी किए गए
मेरे घर से संबंधित नोटिस जारी किया गया, जो स्पष्ट रूप से प्रतिशोध की भावना से उठाया गया कदम प्रतीत होता है। यह दबाव बनाने और मुझे चुप कराने का प्रयास है।
जान से मारने की धमकी और सुरक्षा की मांग
अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने के बाद से मुझे लगातार धमकियां मिल रही हैं। मुझे एवं मेरे परिवार को गंभीर सुरक्षा खतरा है। यदि भविष्य में मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित आरोपित व्यक्तियों एवं प्रशासन की उदासीनता की होगी।
मैं शासन-प्रशासन से तत्काल सुरक्षा की मांग करता हूं।
आंदोलन एवं घेराव की घोषणा
यदि तीन दिवस के भीतर सरपंच एवं संबंधित आरोपितों के विरुद्ध ठोस एवं कठोर कार्रवाई प्रारंभ नहीं की जाती है, तो होली के पश्चात दिनांक 10 मार्च को सचिव कार्यालय, ग्राम सिर्री का शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक घेराव किया जाएगा।
इस संबंध में सोमवार को SDM कार्यालय में लिखित सूचना प्रदान की जाएगी।
यदि प्रशासन समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो प्रदेशवासियों के सहयोग से व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
सरपंच के विरुद्ध विशेष मांगें
1. सरपंच को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
2. जांच पूर्ण होने तक उसे पद से पृथक रखा जाए।
3. जांच में संलिप्तता सिद्ध होने पर तत्काल निष्कासन किया जाए।
4. पूरे षड्यंत्र के मुख्य सरगना की निष्पक्ष जांच कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
मेरी प्रमुख मांगें
1. सरपंच एवं रामायण पटेल के विरुद्ध अवैध खनन, आपराधिक साजिश एवं धमकी के मामलों में तत्काल FIR दर्ज की जाए।
2. पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
3. मुझे एवं मेरे परिवार को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।
4. अवैध खनन में संलिप्त सभी मशीनों एवं वाहनों की विस्तृत जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
5. ग्राम की शासकीय भूमि एवं खनिज संपत्ति को हुए नुकसान का आर्थिक आकलन कर दोषियों से वसूली की जाए।
छत्तीसगढ़ी जनभावना की आवाज
“जेन दिन जनता जाग जाही, ओ दिन अन्याय भाग जाही।
गांव के माटी के रखवारी बर, सिर्री के बेटा डट के खड़ा रहिही।”
अंतिम संदेश
“सच ला दबाय नई जा सकय, अन्याय ला बचाय नई जा सकय।
गांव के हक बर लड़े वाला, कभू घबराय नई सकय।”
गांव बिके नइ सकय – न्याय झुके नइ सकय.




