नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लिखित जवाब में कहा कि अब तक के परीक्षणों और वास्तविक उपयोग के दौरान ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब हुए हों या वाहन के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ा हो।
गडकरी ने बताया कि E20 ईंधन लागू करने से पहले फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, ड्राइविंग परफॉर्मेंस, पार्ट्स की कंपैटिबिलिटी, उत्सर्जन और उपभोक्ता स्वीकार्यता जैसे सभी पहलुओं का परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में ऑटोमोबाइल कंपनियां, ऑटो पार्ट्स निर्माता, **Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM), Automotive Research Association of India (ARAI), वाहन परीक्षण एजेंसियां, तेल विपणन कंपनियां, एथेनॉल उत्पादक तथा चीनी एवं अनाज उद्योग को शामिल किया गया।
सरकार के अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों से E15+ और करीब ढाई वर्षों से E19-E20 मिश्रित पेट्रोल का बड़े स्तर पर उपयोग हो रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E20 ईंधन पर चली हैं। सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन फेल होने, असामान्य जंग, अत्यधिक घिसाव या वाहन की उम्र घटने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया। वाहन निर्माता कंपनियां भी E20 अनुकूल वाहनों पर पहले की तरह वारंटी दे रही हैं।










