W। पश्चिम बंगाल में ममता की TMC में फूट पड़ गई है। सोमवार को पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी के 58 बागी MLA ने विधायक दल का नेता घोषित किया। बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलकर समर्थन पत्र भी सौंपा।
दलबदल विरोधी कानून के अनुसार किसी दल से अलग होने वाले गुट को अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं, ऐसे में न्यूनतम 54 विधायकों का समर्थन जरूरी था। बागी गुट के पास 59 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है, जिससे वे तकनीकी रूप से अयोग्यता से बच सकते हैं।
इस पूरे मामले में विधानसभा स्पीकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत स्पीकर को यह अधिकार प्राप्त है कि वे तय करें कि संबंधित विधायक दलबदल के दोषी हैं या नहीं। साथ ही, किसी विभाजन या विलय को वैध मानने अथवा खारिज करने का अंतिम निर्णय भी स्पीकर ही लेते हैं।
91वें संविधान संशोधन के अनुसार यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक किसी अन्य दल या गुट में शामिल होते हैं, तो उसे वैध विलय माना जा सकता है। हालांकि यह तय करना कि कानूनी शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं, स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है।









