एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर जिले में अभियान तेज, ग्राम बनबागौद पहुंचकर कलेक्टर  ने किया निरीक्षण, लंबित पंजीयन समयबद्ध पूरा करने के दिए निर्देश

धमतरी। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से जिले में एग्रीस्टैक पंजीयन अभियान को गति दी जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने ग्राम बनबागौद पहुंचकर एग्रीस्टैक पंजीयन कार्य का मैदानी निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों के भूमि अभिलेख, खसरा विवरण, सहखातेदारों के पंजीयन तथा लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली और संबंधित मैदानी अमले को आवश्यक निर्देश दिए।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक खातेदार के नाम दर्ज सभी खसरों तथा सभी सहखातेदारों का एग्रीस्टैक पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। जिन किसानों का पंजीयन अभी लंबित है, उनसे व्यक्तिगत संपर्क कर प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाए। उन्होंने ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने तथा जिन क्षेत्रों में पंजीयन की गति अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

धान विक्रय के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन महत्वपूर्ण

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में एग्रीस्टैक में पंजीकृत कृषकों से ही धान खरीदी की जाएगी। ऐसे में किसान के खाते में दर्ज प्रत्येक खसरे और सभी सहखातेदारों का पंजीयन पूर्ण होना आवश्यक है। प्रशासन द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम समय की भीड़ और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीयन पूर्ण कराएं।

एग्रीस्टैक के माध्यम से किसान और उसकी भूमि से संबंधित जानकारी डिजिटल रूप से एकीकृत होगी। इससे भूमि एवं फसल संबंधी विवरण के सत्यापन, पात्र किसानों की पहचान तथा धान खरीदी सहित विभिन्न कृषि एवं किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सुविधा होगी। भविष्य में योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ पहुंचाने में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित होगी।

सोसायटी और सीएससी में पंजीयन की सुविधा

किसानों की सुविधा के लिए संबंधित सहकारी समितियों और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में एग्रीस्टैक पंजीयन की व्यवस्था की गई है। पंजीयन प्रक्रिया ओटीपी आधारित है। इसमें खातेदार के आधार लिंक मोबाइल नंबर पर तीन बार ओटीपी प्राप्त होती है। इसलिए किसानों को पंजीयन के समय आधार से लिंक मोबाइल नंबर साथ रखना आवश्यक है।

पंजीयन के लिए किसान आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, भूमि संबंधी दस्तावेज तथा किसान किताब/किसान पुस्तिका साथ लेकर संबंधित केंद्र पर जाएं। किसी प्रकार की त्रुटि या भूमि संबंधी विवरण में अंतर पाए जाने पर संबंधित राजस्व अमले से समन्वय कर उसका निराकरण कराया जा सकता है।

विशेष श्रेणी के किसानों को भी एग्रीस्टैक से जोड़ा जा रहा

इस वर्ष एग्रीस्टैक पंजीयन का दायरा बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष वनाधिकार मान्यता पत्रधारी, डूबान भूमिधारक, शासकीय पट्टेधारक, शासकीय भूमि पर खेती करने वाले कृषक, संस्थागत कृषक, कोटवार तथा रेगहा-अधिया कृषकों सहित 25,810 कृषकों को एग्रीस्टैक पंजीयन से छूट प्राप्त थी। इस वर्ष इन श्रेणियों को भी एग्रीस्टैक व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।

विशेष रूप से रेगहा-अधिया पर खेती करने वाले लघु एवं सीमांत कृषकों का भी पंजीयन कराया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक कृषकों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ा जा सके। वर्तमान में विशेष श्रेणी के 1,262 कृषकों के 12,130 खसरों का पंजीयन शेष है। वनाधिकार मान्यता पत्रधारकों तथा डूब भूमि के नवीन पट्टेधारकों का पंजीयन सोसायटी मॉड्यूल में प्रारंभ कर दिया गया है।

लंबित प्रकरणों के निराकरण पर विशेष जोर

जिले में एग्रीस्टैक पंजीयन को गति देने के लिए अनुभाग, तहसील और ग्राम स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। पटवारी, राजस्व निरीक्षक, आरएईओ, एसएडीओ, समिति सचिव, रोजगार सहायक और कोटवार सहित मैदानी अमले को लंबित पंजीयन पूर्ण कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रशासन द्वारा शेष 73,823 बकेटिंग क्लेम तथा विशेष श्रेणी के लंबित 12,130 खसरों को समयबद्ध तरीके से एग्रीस्टैक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ग्रामवार प्रगति की निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों के मैदानी अमले के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

किसानों से समय रहते पंजीयन कराने की अपील

कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खाते में दर्ज प्रत्येक खसरे और सभी सहखातेदारों का एग्रीस्टैक पंजीयन जल्द से जल्द पूर्ण कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर पंजीयन होने से धान विक्रय के समय अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकेगा और खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुचारू एवं पारदर्शी रूप से संपादित की जा सकेगी।

जिला प्रशासन ने किसानों से यह भी आग्रह किया है कि वे अपने भूमि अभिलेख एवं मोबाइल नंबर से संबंधित जानकारी पहले से जांच लें। किसी प्रकार की विसंगति होने पर अंतिम समय का इंतजार न करते हुए संबंधित समिति, सीएससी अथवा राजस्व अमले से संपर्क कर आवश्यक सुधार एवं पंजीयन की प्रक्रिया समय रहते पूरी कराएं।

Hamar Dhamtari
Author: Hamar Dhamtari

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