समय पर पूंजी से पशुधन प्रबंधन, उत्पादन और आजीविका को मिल रहा आधार
धमतरी। पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनाने और पशुपालकों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में पशुधन विकास विभाग द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच जिले से 142 पशुपालन केसीसी प्रकरण विभिन्न बैंकों को प्रेषित किए गए, जिनमें से 93 पशुपालकों के कुल 98 लाख 62 हजार 900 रुपए के ऋण प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं।
पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पात्र पशुपालकों को पशुओं के चारा-दाना, दवाइयों, टीकाकरण, पशु चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक रख-रखाव संबंधी खर्चों के लिए संस्थागत ऋण सुविधा उपलब्ध होती है। इससे पशुपालकों को अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों के लिए अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। समय पर पूंजी उपलब्ध होने से पशुओं के बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के साथ दुग्ध उत्पादन और पशुपालन गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की रही महत्वपूर्ण भूमिका
जिले में स्वीकृत केसीसी ऋण प्रकरणों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बैंक द्वारा 82 पशुपालकों को 83 लाख 92 हजार 900 रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया है। इसी प्रकार बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा 4 पशुपालकों को तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक द्वारा 5 पशुपालकों को, कुल 5 लाख 60 हजार रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा एक हितग्राही को 1 लाख 50 हजार रुपए तथा यूको बैंक द्वारा एक हितग्राही को 2 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया है।
यह पहल पशुपालन क्षेत्र में संस्थागत वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की आजीविका को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पशुपालकों को आवश्यकता के समय वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने से वे अपने पशुधन की देखभाल बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं तथा पशुपालन को केवल सहायक गतिविधि के बजाय नियमित एवं आय-सृजनकारी व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में सक्षम हो रहे हैं।
गांव-गांव पहुंच रही योजना की जानकारी
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पशुपालकों को पशुधन की देखभाल और व्यवसाय के लिए समय पर पूंजी उपलब्ध हो, इसके लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना आवश्यक है।” उन्होंने पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों को गांव-गांव में जागरूकता बढ़ाने, पात्र पशुपालकों की पहचान करने तथा उन्हें योजना से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप पशुधन विकास विभाग के मैदानी अमले द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों से संपर्क कर उन्हें योजना की पात्रता, ऋण सुविधा, आवश्यक दस्तावेज एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। विभाग द्वारा पशुपालकों को बैंकिंग संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर आवेदन प्रस्तुत करने के लिए भी आवश्यक मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
पशुधन की उत्पादकता और आय बढ़ाने में सहायक
पशुपालन के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और नियमित देखभाल से सीधे जुड़ी है। समय पर ऋण सुविधा मिलने से पशुपालक गुणवत्तापूर्ण चारा-दाना, आवश्यक पशु औषधियां एवं अन्य सामग्री की व्यवस्था कर सकते हैं। इससे पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादकता में सुधार के साथ दूध उत्पादन, पशुधन की गुणवत्ता और परिवार की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत होती हैं।
पशुधन विकास विभाग द्वारा पशुपालकों को ऋण सुविधा के साथ-साथ पशु चिकित्सा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, पोषण एवं वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस प्रकार वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग का समन्वय पशुपालन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, उत्पादक और टिकाऊ बनाने में सहायक हो रहा है।
जिले में पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड योजना की बढ़ती पहुंच ग्रामीण पशुपालकों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता, बेहतर पशुधन प्रबंधन और स्थायी आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रही है।









