जिले के करीब 1 लाख 59 हजार 248 निवेशक 335 चिटफंड कंपनियों की ठगी का शिकार हुए
धमतरी। छत्तीसगढ़ में फर्जी चिटफंड कंपनियों द्वारा आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का दर्दनाक असर आज भी धमतरी जिले में दिखाई दे रहा है। जिले के करीब 1 लाख 59 हजार 248 निवेशक 335 चिटफंड कंपनियों की ठगी का शिकार हुए हैं। इन कंपनियों पर करीब 4 अरब 35 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है।
ठगी की इस घटना को 8 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, जबकि रकम वापसी के लिए निवेशकों द्वारा दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किए भी लगभग 5 साल गुजर चुके हैं। इसके बाद भी बड़ी संख्या में प्रकरण ट्रिब्यूनल कोर्ट में लंबित हैं। निवेशक आज भी तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर, एसपी कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री निवास तक अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की गुहार लगा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार चिटफंड कंपनियों ने अधिक ब्याज और कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर लोगों से निवेश कराया था। स्कीम की अवधि पूरी होने पर जब निवेशकों ने राशि वापस मांगी तो कई कंपनियां अपने कार्यालय बंद कर फरार हो गईं। ठगी का एहसास होने के बाद बड़ी संख्या में पीड़ित सामने आए और धमतरी कलेक्टोरेट में दस्तावेजों के साथ दावा आवेदन जमा किए।
मामले में धमतरी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 40 से अधिक चिटफंड कंपनियों के डायरेक्टर, मैनेजर, लिपिक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके बावजूद निवेशकों को पूरी राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया अभी भी कानूनी दांव-पेंच में उलझी हुई है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि, चिटफंड मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल कोर्ट में चल रही है। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। धमतरी जिले में अब तक केवल 3 चिटफंड कंपनियों से संबंधित राशि की वापसी हो सकी है।








