नईदिल्ली। भारत में जल्द ही ऐसी कारें सड़कों पर दौड़ती दिखेंगी, जो न तो पेट्रोल-डीजल और CNG से चलेंगी और न ही उनमें बैटरी होगी। केंद्र सरकार ने 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, इसे सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें कंपनी ने खासतौर पर E100 फ्यूल से चलने के लिए बनाया हो। नए नियमों से ऐसी कारों की टेस्टिंग और उन्हें चलाने की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
23 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए इन ईंधनों से चलने वाले वाहनों के लिए उत्सर्जन मानकों, ईंधन विनिर्देशों और टेस्टिंग से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। इस बदलाव से वाहन निर्माता कंपनियों के लिए E100 फ्लेक्स-फ्यूल कारों को विकसित करने, उनकी टेस्टिंग कराने और जरूरी प्रमाणन हासिल करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। हालांकि, नियमों में संशोधन का मतलब यह नहीं है कि E100 से चलने वाली कारें तत्काल बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी। इनके लॉन्च के लिए कंपनियों को उपयुक्त वाहन तैयार करने और निर्धारित मानकों के अनुसार प्रमाणन हासिल करने की जरूरत होगी।
E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग पूरी तरह इथेनॉल होता है। इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे आमतौर पर गन्ने और अन्य जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। वहीं, E85 ईंधन में इथेनॉल का अनुपात लगभग 85% होता है, जबकि शेष हिस्सा मुख्य रूप से पेट्रोल होता है। इन दोनों ईंधनों का इस्तेमाल ऐसे वाहनों में किया जाता है, जिन्हें अधिक मात्रा में इथेनॉल के अनुकूल बनाया गया हो।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस वाहन अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर चल सकते हैं। हालांकि, किसी वाहन में किस अनुपात तक इथेनॉल इस्तेमाल किया जा सकता है, यह उसके डिजाइन और निर्माता की ओर से मिले प्रमाणन पर निर्भर करता है। E100 के लिए तैयार वाहन में इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और ईंधन के संपर्क में आने वाले दूसरे हिस्सों को इथेनॉल के अनुकूल बनाना जरूरी होता है।









